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शामली की रामलीला में लंका दहन करके हनुमान ने दिखाई ताकत

Mon, 10 Oct 2016 04:23 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, शामली
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ramleela - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शामली/कैराना। श्रीहनुमान धाम के श्रीराम लीला रंगमंच पर सीता खोज, अशोक वाटिका विध्वंस, अक्षय कुमार वध लंका दहन की लीला का मंचन किया गया।
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 शनिवार रात्रि हनुमान धाम के श्रीरामलीला रंगमंच पर बाली वध के बाद वानर सेना राजकुमार अंगद के नेतृत्व में सीता की खोज में दक्षिण दिशा की ओर जाती है। समुंदर पार के लिए जामवंत बजरंग बली को उनकी दिव्य शक्तियों याद दिलाते हैं। जिसके बाद हनुमान लंका पहुंच जाते हैं। सीता की खोज में राजमहल में महाराजा  विभीषण के यहां पहुंचते है। जहां राम राम की ध्वनि गूंज रही थी। विभीषण से हनुमान मिलते हैं। हनुमान अशोक वाटिका में पहुंचकर पेड़ पर बैठ जाते हैं और राम की दी गई अंगूठी को नीचे डाल देते हैं। सीता अंगूठी देखकर आश्चर्य चकित होती है। हनुमान उनको अपना परिचय राम भक्त के रूप में देते हैं। 

अशोक वाटिका में हनुमान के उत्पात के दौरान रावण के पुत्र अक्षय कुमार के साथ युद्ध होता है। जिसके अक्षय मारा जाता है। इंद्रजीत मेघनाथ को अशोक वाटिका भेजते हैं और ब्रह्म पाश में बांधकर रावण के दरबार में ले जाते हैं। रावण हनुमान जी की पूछ में आग लगाने का आदेश देता है। हनुमान सोने की  लंका का जलाकर राख देता है। श्रीहनुमान धाम के प्रधान सलील द्विवेदी ने बताया कि कल विजयदशमी मनाई जाएगी। मौके पर विशाल मेले का आयोजन किया जाएगा।
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उधर, कैराना में गौशाला भवन कैराना में चल रही रामलीला में सभा में अपने भाई विभीषण को अपमानित कर धक्का मार बाहर निकाल देता है।
विभीषण राम के दल में पहुंचकर रामचंद्र की शरण में आकर दया की भीख मांगता है। उधर वानर सेना समुंदर पर पुल तैयार करती हैं। पुल तैयार करने के बाद अंगद लंका में पहुंचकर रावण से बहस करता है और कहता है कि अगर किसी में ताकत है तो हिला दे इस पैर को। कोई योद्धा अंगद का पैर नहीं हिला पाता।

फिर रावण मेघनाथ को भेजता है। लेकिन मेघनाथ अगंद के पैर को नहीं हिला सका। उसके बाद रावण खड़ा होता है। जैसे ही रावण खड़ा होता है। तो अंगद अपना पैर पीछे हटा देता है और युद्ध का ऐलान कर वापस चला आता है। रावण का अभिनय रमेश चंद्र वर्मा, विभीषण का अभिनय रिशिपाल शेरवाल, मेघनाथ का अभिनय डिंपल अग्रवाल, साखी व प्रहस्त का अभिनय राकेश, सीता माता का अभिनय शिवम गोयल, रामचंद्र की अभिनेता सतीश प्रजापति, लक्ष्मण का अभिनय रोहित, हनुमान अभिनय आशु गर्ग ने किया।

धू-धू कर जली सोने की लंका
गढीपुख्ता। मोहल्ला सुभाषपुरी के रामलीला ग्राउंड में चल रही रामलीला में राम- सुग्रीव मिलन बालि वध और लंका दहन की लीला का मंचन किया गया। पहले दृश्य में राजा सुग्रीव और श्रीराम चन्द्र का मिलन होता है। मिलन के साथ ही उनकी मित्रता हो जाती है। इसके बाद सुग्रीव बालि के साथ युद्ध करने जाते हैं और युद्ध में श्रीराम चन्द्र के हाथों बालि का वध होता है।
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बालि अपने पुत्र अंगद को श्रीराम के हाथों में सौंप देते है। जिसके बाद हनुमान जी लंका पहुंचते हैं। इसके बाद हनुमान जी को बंदी बनाकर सभा में लाया जाता है। हनुमान जी लंका में आग लगा देते हैं। रामलीला में इस दौरान श्रीपाल जैन, नरेश कुमार सैनी, रामपाल सिंह, राजेन्द्र शर्मा, भूषण लाल, टेकचन्द, नीरज जैन अध्यक्ष, राजवीर सिंह, चरण सिंह, मैनपाल, नरेश गिरी, नेमचन्द सैनी, आदि मौजूद रहे।
 
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