शामली। आर्य समाज के 144वां त्रिदिवसीय स्थापना दिवस रविवार 31 कुंडीय विराट यज्ञ के साथ संपन्न हो गया। आर्य उपदेशक डॉक्टर प्रियवंदा वेदभारती ने कहा कि गुरुकुल और गाय देश की संस्कृति है, जिनकी रक्षा जरूरी है।
आर्य समाज मंदिर के प्रांगण में त्रिदिवसीय स्थापना दिवस के समापन समारोह में 31 कुंडीय विराट यज्ञ में 124 यज्ञमानों ने आहुति दी। यज्ञ के ब्रह्मा आर्य समाज के पुरोहित डॉक्टर रविदत्त आर्य रहे। नजीबाबाद गुरुकुल की आचार्य डॉ. प्रियवंदा वेदभारती ने प्रवचन में कहा कि वेदों का पढ़ना पढ़ाना, सुनना, सुनाना सभी आर्यों का परम धर्म है।
गाय और गुरुकुल देश की सांस्कृतिक है, जिसकी रक्षा आवश्यक है। मुख्य अतिथि राज्य महिला आयोग की सदस्य डॉ. प्रियावंदा तोमर ने कहा कि आर्य समाज में शुद्ध वैदिक परंपरा का निर्वहन किया जाता है। आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती ने छूआछूत और जातिगत भेदभाव का विरोध किया। आर्य प्रतिनिधि सभा उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष डॉ. धीरज सिंह आर्य ने कहा कि आर्य समाज की कार्य योजना बनाकर अनुशासन से आर्य समाज मंदिरों का संचालन करने का आह्वान किया। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचार के लिए तीन रथ बनाए जा रहे हैं। जिस आर्य समाज को आवश्यकता होगी, रथ उनके पास भेज दिया जाएगा। आर्य समाज विवाह प्रमाण पत्रों में आजकल फर्जीवाड़ा सामने आया है। आर्य प्रतिनिधि सभा उप्र के द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र ही वैध माना जाएगा।
कार्यक्रम को प्रदेशीय मंत्री स्वामी धर्मेश्वरानंद, प्रदेशीय कोषाध्यक्ष अरविंद आर्य, आर्य समाज के संरक्षक रघुवीर सिंह आर्य, पूरण चंद आर्य, पूर्व चेयरमैन अरविंद संगल ने संबोधित किया। संचालन आर्य विद्यासभा के मंत्री दिनेश आर्य ने किया। कार्यक्रम के संयोजक आर्य विद्यासभा के प्रधान राजपाल सिंह आर्य, कोषाध्यक्ष रामेश्वर दयाल आर्य रहे। इस अवसर पर मंदिर के प्रधान विनोद आर्य, मंत्री देवेंद्र देव आर्य, कोषाध्यक्ष रविकांत आर्य, आर्य युवक परिषद के संरक्षक वेदप्रकाश आर्य, युवक परिषद के प्रधान सूर्यप्रताप आर्य, मंत्री उत्सव आर्य, कोषाध्यक्ष शुभम आर्य, मुकेश चौधरी, संरक्षिका कमला देवी आर्य, कौशल्या आर्य, सुनीता पाल, नीलम आर्य, उषा आर्य, श्वेता आर्य, मृणाली आर्य, प्राची आर्य, अवंतिका आर्य आदि उपस्थित रहे। भजनोपदेशक योगेशदत्त आर्य ने भजनों के माध्यम से वेदवाणी का प्रचार किया।