शामली। गरीबों की मददगार बताई जाने वाली सरकारी योजनाएं क्या हवा में तैर रही हैं, जो बबलू कश्यप और पाला कश्यप जैसे बेबस गरीब दिखाई नहीं देते। या जानबूझकर ऐसे गरीबों को नजरअंदाज कर दिया जाता है। चाहे जो हो, मगर जलालाबाद में हुए हादसे ने सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल उठा दिया है। तभी तो छप्पर में रहने वाले दोनों भाइयों का राशन कार्ड तक नहीं बनवाया जा सका।
जलालाबाद के मोहल्ला शाहगाजीपुरा में रहने वाले सगे भाई बबलू और पाला कश्यप का परिवार बेहद गरीब है। आलम यह है कि रहने को मकान तक नहीं, गुजर बसर को कोई ठोस जरिया नहीं। दोनों भाई मजदूरी करके परिवार पाल रहे थे। मकान न होने की वजह से दोनों भाइयों ने कुछ समय पूर्व ही लकड़ी की बल्लियों और घास फुंस के सहारे छप्पर बनाया था, पर उन्हें क्या पता था कि सिर छिपाने को बनाया जा रहा छप्पर ही यम का दूत बन जाएगा।
उधर, हादसे के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता और कस्बे के लोग मौके पर पहुंचे, तो हर किसी की जुबां पर दोनों भाइयों की तंगहाली का जिक्र था। कुछ लोगों ने बताया कि दोनों भाइयों ने कांशीराम आवास और डॉ. राममनोहर लोहिया आवास योजना के तहत आवास बनवाने की मांग की थी, लेकिन अधिकारियों को इनकी गरीबी नजर नहीं आई।
राशन कार्ड न होने के कारण इनको सरकारी योजना का लाभ नहीं दिया गया। सवाल यह उठता है कि सरकारी योजनाएं ऐसे गरीबों के लिए नहीं हैं, तो फिर कैसे गरीबों के लिए बनाई जा रही हैं। या फिर सरकार की योजनाओं को महज कागजों पर ही पूरा किया जा रहा है।