अलविदा थ्री नॉट थ्री, अब पुलिस वाले संभालेंगे इंसास
शामली। लंबे समय तक उत्तर प्रदेश पुलिस की शान रही थ्री नॉट थ्री (.303 बोर) राइफल अब विदा हो जाएगी। गणतंत्र दिवस की परेड में अंतिम बार इसे शामिल किया जाएगा। राइफल की खूबियों की जानकारी देकर सम्मानजनक तरीके से विदाई दी जाएगी।
इस बार 26 जनवरी को .303 राइफल की शानदार परेड के साथ विदाई होने जा रही है। इनके स्थान पर इंसास राइफल उपलब्ध कराई जा रही हैं। रिजर्व पुलिस लाइन के प्रतिसार निरीक्षक हरमीत सिंह ने बताया कि जनपद में .303 की 86 राइफलें हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल ड्यूटी में नहीं किया जा रहा है। ये सभी राइफलें जमा हो चुकी है। इनके स्थान पर इंसास और एसएलआर का ड्यूूटी में प्रयोग किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ब्रिटेन की कंपनी द्वारा 1901 में बनी .303 बोर की राइफल अंतिम बार गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल की जाएगी। इसके बाद सलामी देकर सम्मानजनक तरीके से इसको विदाई दी जाएगी।
राइफल में भी कई खूबियां - विजय गर्ग
सेवानिवृत्त आईजी विजय गर्ग का कहना है कि पुलिस की लंबे समय तक हमसफर रही .303 बोर की राइफल में कई खूबियां है। इस राइफल से निशाना लगाना जल्दी और आसानी से सीख सकते है, क्योंकि इसमें एक बार में एक ही गोली चलती है। कंधे से मिलाकर एक आंख बंद कर टॉरगेट पर निशाना लगाया जा सकता है। इसलिए इस राइफल को सिखलाई वाली राइफल भी कहा जाता है। इस राइफल को हैंडलिंग करने में आसानी रहती है। धूल भरे इलाके और बरसात के मौसम में भी इस राइफल में किसी तरह की रुकावट नहीं आती। अब आधुनिक तकनीक और बेहतर सुविधाजनक राइफल इंसास आ गई है, जिसके चलते उसे बंद किया जा रहा है।
---- दोनों राइफल में अंतर
- प्वाइंट 303 बोर की राइफल में एक्शन मेकेनिकल है, एक-एक गोली के लिए लोड करना पड़ता है, जबकि इंसास आधुनिक तकनीक से युक्त सेमी ऑटोमेटिक है।
- इंसास की लंबाई और वजन कम है, जबकि .303 बोर की राइफल ज्यादा लंबी और वजनी है।
- मारक क्षमता भी इंसास राइफल की अधिक है। इंसास की मैगजीन बड़ी है, जिसमें गोली अधिक आती है।
- प्वाइंट 303 बोर की राइफल गोली चलाते समय कंधे में झटका देती है, जबकि इंसास में ऐसा नहीं है।