शामली। सर शादीलाल शुगर मिल डिस्टलरी यूनिट के बायोगैस प्लांट से गैस रिसाव के कारण बच्चों के बीमार होने के मामले में दिल्ली से आई टीम ने सर्वे पूरा करा लिया है।
टीम ने मोहल्ला दयानंदनगर के 1900 घरों में रहने वाले लोगों से बातचीत के अलावा सरस्वती शिशु मंदिर जूनियर हाईस्कूल और बालिका इंटर कॉलेज के छात्र छात्राओं से निर्धारित प्रारूप पर सवालों का जवाब लिया।
10 अक्तूबर को सर शादीलाल ग्रुप की डिस्टलरी यूनिट के बायोगैस प्लांट से गैस रिसाव होने पर सरस्वती शिशु मंदिर जूनियर हाईस्कूल और बालिका इंटर कॉलेज के करीब 300 छात्र छात्राओं की हालत बिगड़ गई थी। इनमें से 110 बच्चों का इलाज सीएचसी शामली में कराया गया था, जबकि कुछ बच्चों का इलाज प्राइवेट अस्पताल में कराया गया था। इस मामले की जांच के लिए केंद्रीय रोग नियंत्रण की टीम पिछले कई दिनों से शामली में ठहरी हुई है।
टीम द्वारा मोहल्ला दयानंदनगर और दोनों स्कूलों में पहुंचकर सर्वे कराया गया। सोमवार दोपहर तक 1900 घरों का सर्वे पूरा कर लिया। इस दौरान टीम ने घर में मौजूद लोगों से बातचीत की।
कॉलोनी का सर्वे पूरा करने के बाद टीम सरस्वती शिशु और बालिका स्कूल में पहुंची और वहां पढ़ने वाले करीब 1900 बच्चों से बात की। अब टीम विश्लेषण कर आंकड़ों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार करने में जुट गई है। यह रिपोर्ट स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजी जाएगी।
एक सौ बच्चे और आए सामने
शामली। टीम ने स्कूल में बच्चों से बात की और उनका फार्मेट भरा तो पता चला कि स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड में जिन बच्चों के नाम दर्ज हैं। उनके अलावा करीब 100 बच्चे और सामने आए है, जिनको गैस रिसाव के कारण परेशानी हुई थी। हालांकि परिजनों ने उन बच्चों को निजी अस्पतालों में ले जाकर उपचार दिला दिया था।
रात नौ बजे से मुंह कड़वा होने लगा था
टीम द्वारा कराए गए सर्वे में कई पहलू उजागर हुए हैं। सर्वे के दौरान कुछ बच्चों ने बताया कि नौ अक्तूबर की रात करीब नौ बजे उनका मुंह भी कड़वा हुआ था और उनको सांस लेने में परेशानी सामने आई थी। अगले दिन 10 अक्तूबर को सुबह स्कूल में पहुंचने के दौरान तबीयत और खराब हो गई थी तथा करीब 300 बच्चे बीमार हो गए थे।