वेस्ट यूपी के तीन जिलों में पंद्रह से लेकर बीस प्रतिशत गन्ने की फसल में सफेद पत्ती समस्या बनी हुई है। इसके कारण पौधे की बढ़वार प्रभावित होने की आशंका है। कृषि वैज्ञानिकों ने समस्या को ध्यान में रखते हुए समय से उपचार की सलाह दी है।
शामली कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैैज्ञानिक डाक्टर विकास मलिक के मुताबिक वेस्ट यूपी के शामली, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर जिलों के ज्यादातर किसानों की शिकायत है कि गन्ने की फसल में सफेद पत्तियां बढ़ती जा रही है। बताया कि लोहे की कमी के कारण गन्ने की नई पत्तियों में हरापन बनना कम हो जाता है। जमीन में पीएच मान या कैल्शियम कार्बोनेट की मात्रा अधिक हो या जहां खारे पानी से सिंचाई की जाती हो या बलुई भूमि जहां जैविक कार्बन कम हो, वहां गन्ने की फसल में जस्ते लोहे की कमी हो सकती है। लोहा पौधों में भोजन बनाने में सहायक है। लोहे की कमी के कारण नई पत्तियों में हरापन बनना कम हो जाता है। कृषि वैज्ञानिक के अनुसार पत्तियों की शिराओं की मध्य भाग का हरा पन खत्म हो जाता है। इस तरह मध्य शिरा के समानांतर हरी धारियां बन जाती है। अधिक कमी होने पर शिराएं भी सफेद हो जाती है। पत्तियां सफेद होकर कागज के समान लगती हैं। पौधों की वृद्धि रुक जाती है और पैदावार पर बुरा असर पड़ता हैं। लोहे की कमी में गन्ना तो बन जाता है परंतु रस में चीनी की मात्रा बहुत कम होती है।
ऐसे करे उपचार
यदि खड़ी फसल में लोहे की कमी के लक्षण दिखाई दें एक प्रतिशत फैरस सल्फेट तथा दो प्रतिशत यूरिया का घोल बनाकर फसल पर 2-3 छिड़काव 10-12 दिन के अंतराल पर करें। इससे फसल की बढ़वार हो जाती है और रस की गुणवता पर भी अच्छा प्रभाव पड़ता है।