बीमारी के चलते हुए पूर्व विधायक राव वारिस की माता राव मुसर्रत के निधन से कार्यकर्ताओं में शोक की लहर दौड़ गई । लोगों का कहना है कि राव मुर्सरत एक साहसी महिला थीं। जिन्होंने अपने पति की मौत के बाद उनकी राजनीतिक विरासत को न सिर्फ संभाला बल्कि अपने बेटे को विधायक बनाने में अहम भूमिका निभाई। लोगों का कहना है कि समाज में सदियों तक राव मुसर्रत बेगम को याद किया जाएगा।
वर्ष 2007 में हुए विधानसभा चुनाव में विधायक बने राव वारिस की माता राव मुसर्रत बेगम का बीमारी के चलते निधन हो गया। बता दें कि राव वारिस को राजनीति उनके माता-पिता की विरासत में मिली थी। वर्ष 1969 में उनके पिता राव राफे खां चुनाव जीतकर विधायक बने।
इसके बाद 90 के दशक में उनकी मृत्यु हो गई। मौत के बाद परिवार में सिर्फ उनकी पत्नी ही राजनीति की जिम्मेदारी निभा सकती थीं, क्योंकि उस समय उनका बेटा बहुत छोटा था। इस पर राव मुसर्रत बेगम ने जिम्मेदारी संभाली ओर विकास कार्यों में जुट गईं।
इस दौरान उन्होंने वर्ष 2000 में हुए उपचुनाव में रालोद के संबल पर चुनाव लड़ा, हालांकि इस दौरान वह भाजपा के जगत सिंह से चुनाव हार गईं। इसके बाद भी मुसर्रत बेगम ने हिम्मत नहीं हारी।
वर्ष 2007 में मुसर्रत बेगम की चुनाव लड़ने की पूरी तैयारी थी लेकिन एन वक्त पर समर्थकों ने उनके स्थान पर बेटे राव वारिस को चुनाव लड़ाने का दबाव बनाया। हालांकि, उस समय राव वारिस पीसीएस जे की परीक्षा पास कर आगे की तैयारी कर रहे थे लेकिन समर्थकों ओर मां के कहने पर उन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला लिया।
राव मुसर्रत बेगम की मेहनत का ही परिणाम था कि राव वारिस चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंच गए। आज उनके पैतृक गांव में गम का माहौल है। लेकिन हर किसी की जुबां पर सिर्फ मुसर्रत बेगम की तारीफ है। लोगों का कहना है कि वह मिलनसार थीं। हर किसी के सुख दुख में शामिल होती थीं।