शामली। पांच सौ और एक हजार रुपये के नोट बंदी से बाजार में मची हायतौबा के बीच किसान भी बुरी तरह पिस रहा है। गन्ने की कटाई हो रही है, खेत खाली होने लगे हैं, मगर गेहूं की बुवाई पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इफ्को के गोदाम से खाद और गेहूं का बीज खरीदने में दिक्कत आने से किसान गेहूं की बुवाई नहीं कर पा रहे हैं।
बड़ी संख्या में किसान सहकारी समिति और इफ्को के केंद्रों से बीज और खाद की खरीद करते हैं। क्योंकि सरकार की ओर से खाद और बीज पर दी जाने वाली सब्सिडी सहकारी समिति और इफ्को के केंद्र से खरीदारी करने पर ही मिल पाती है। केंद्र पर नोटिस लगा दिया गया है कि पांच सौ और एक हजार के नोट स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
यदि किसान बाजार से खाद और बीज खरीदता है, तो वह काफी महंगा पड़ता है। बाजार में भी व्यापारी पांच सौ और एक हजार रुपये का नोट नहीं ले रहे। ऐसे में किसान अपने भरोसे के बूते ही व्यापारी से बीज और खाद की खरीद उधार कर रहे हैं। गांव कुडाना के किरतपाल सिंह, भैंसवाल निवासी योगेंद्र सिंह, विनय, सतेंद्र, सुरेंद्र और धर्मपाल आदि का कहना है कि नोटबंदी होने से किसानों के सामने बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई है। गन्ने की कटाई होने पर खेत खाली हो गए हैं, गेहूं की बुवाई करनी है। बाजार से महंगे दाम पर खाद और बीज खरीदना पड़ रहा है।
काम छोड़कर लाइन में लगने की मजबूरी
जरूरत के सामान की खरीदारी करने के लिए किसानों को नोट बदलवाने के लिए बैंकों पर लाइन में भी लगना पड़ रहा है। कच्ची गढ़ी निवासी राजकुमार, बलवा निवासी जमशेद, टिटौली निवासी राकेश का कहना है कि बाजार से खाद और बीज खरीदने के लिए भी छोटे नोट होने जरूरी हैं, जिसके लिए सुबह होते ही बैंक की तरफ भागना पड़ता है। इस वजह से रोजमर्रा के काम भी प्रभावित हो रहे हैं।