रोहित अग्रवाल
शामली। कोरोना संक्रमण रोकने को किया गए लॉकडाउन में लोग चाट पकौड़ी और बाहर के खानपान से दूर हैं। बच्चों के चाउमीन, बर्गर, पास्ता आदि फास्ट फूड पर अंकुश लगा है। लिहाजा उनकी सेहत सुधर रही है। यही वजह है कि पिछले एक सप्ताह में चिकित्सकों के यहां पेट संबंधी मरीजों की संख्या 70 फीसदी तक कम हो गई है। सबसे अहम बात है कि अप्रैल माह में हर साल अब तक शुरू होने वाली चिकन पॉक्स ओर मीजल्स से भी इस बार राहत है।
दरअसल बच्चे खाना कम और फास्ट फूड अधिक खा रहे हैं। चाउमीन, बर्गर और पिज्जा उनकी पहली पसंद है। आमदिनों में फास्ट फूड के ठेलों पर भीड़ लगी रहती है। इसी तरह टिक्की, समोसे चाट आदि बड़ो की पसंद होती है, लेकिन आजकल चाट-पकौड़ी और पिज्जा हट बंद हैं। होटल रेस्टोरेंट में भी ताले लगे हैं लिहाजा लोग बाहर की बनी इन चीजों से दूर हैं। बच्चों की भी फास्ट फूड से दूरी बन गई है, लेकिन ये दूरी उनकी सेहत के लिए वरदान साबित हो रही है।
चिकन पॉक्स और मीजल्स के केस भी नहीं आए
बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर वेदभानू मलिक के अनुसार हर साल मार्च के आखिरी सप्ताह और अप्रैल माह की शुरूआत में ही बच्चों को चिकन पॉक्स और मीजल्स के केस आने शुरू हो जाते हैं, लेकिन इस बार अभी तक एक भी केस नहीं है। ना ही किसी ने इस संबंध में फोन किया और ना ही ओपीडी में कोई आया। दरअसल ये बीमारी भी कोरोना की तरह ही एक दूसरे के संपर्क में आने से होती है, लेकिन लॉकडाउन में लोग घरों में है इसलिए इस बीमारी से भी बचाव हो रहा है। बच्चों को बाजार का फास्ट फूड और तला भुना ना मिलने से पेट संबंधी बीमारियां भी नाममात्र की रह गई हैं।
पेट के रोगियों की संख्या में कमी
फिजीशियन डॉक्टर रविंद्र तोमर के अनुसार बाजार के फास्ट फूड, चाट-पकौड़ी आदि तला भुना खाने से ही पेट संबंधी रोग होते हैं जो पेट में इंफेक्शन पैदा कर कई बीमारियां करते हैं। लॉकडाउन के कारण लोग बाहर के खानपान और फास्ट फूड से दूर हैं और घर का बना सामान्य खाना खा रहे हैं। इसी वजह से पेट संबंधी बीमारियां कम हो गई है और बच्चों की सेहत ठीक है। लॉकडाउन से पहले उनके यहां औसतन प्रतिदिन 25 मरीज पेट संबंधी बीमारियों के आते थे लेकिन अब मुश्किल से पांच केस रह गए हैं। अभिभावक लॉक डाउन के बाद भी इन पर अंकुश रखें तो ये काफी बेहतर होगा।