शामली में आम बजट को लेकर किसानों में तीखी प्रतिक्रिया है। किसानों का कहना है कि आम बजट में किसानों के लिए कुछ भी नहीं है। किसान की अहम जरूरत भी ध्यान में नहीं रखी गई। डीजल और बिजली की दरों में कमी होनी चाहिए थी, लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया।
दरअसल, शुगर मिल प्रबंधनों द्वारा निर्धारित 14 दिन में किसानों को बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं किया जा रहा है। वहीं, डीजल की कीमतों मेें भी लगातार उछाल आ रहा है। इस वजह से फसलों के लागत मूल्य में बढ़ोतरी होने पर किसानों की अपेक्षाएं सरकार के प्रति बढ़ गई। बृहस्पतिवार को जब केंद्र सरकार ने आम बजट पेश किया, तो उसमें सभी फसलों का मूल्य निर्धारित करने और फसलों का मूल्य लागत के सापेक्ष डेढ़ गुना दिलाने की बात कही गई। हालांकि किसानों का स्पष्ट कहना है कि इससे किसानों का भला नहीं होगा, क्योंकि जिन फसलों का मूल्य पहले से निर्धारित होता रहा हैष उसका समय पर भुगतान तो मिलता ही नहीं है।
-- सोमपाल सिंह भैंसवाल ने कहा कि सरकार की गलत नीतियों के कारण ही किसान कर्ज में डूबता है। सरकार जो वादे करती है, वह पूरे नहीं होते। 14 दिन में गन्ना मूल्य भुगतान के दावे भी हवा हवाई साबित हो रहे हैं। डीजल और बिजली की महंगाई ने किसानों की हालत पतली कर दी है।
-- महिपाल सिंह भैंसवाल ने कहा कि डीजल और बिजली के दाम बढ़ गए। हर उत्पाद पर महंगाई है, लेकिन किसानों की फसलों के मूल्य में बढ़ोतरी नहीं होती। गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं हो रहा है। ऐसे तो किसान का भला नहीं होगा। आम बजट किसान विरोधी है।
-- इंद्रपाल सिंह ऊन ने कहा कि किसानों की सबसे बड़ी जरूरत है समय पर भुगतान। सरकार का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। आम बजट में किसानों के लिए अपेक्षा के अनुरूप कोई घोषणा नहीं हुई, जिस कारण किसानों के लिए यह बजट खोखला है।
-- रणपाल सिंह मालैंडी ने कहा कि फसलों का मूल्य तो गन्ने का भी निर्धारित है, लेकिन भुगतान नहीं होता। भुगतान के लिए बार बार नेता वादे करते हैं, लेकिन चीनी मिलें भुगतान नहीं करती है। बिजली की दरें बढ़ गई हैं, डीजल भी महंगा है। किसान अपना काम कैसे चलाएगा। आम बजट किसानों के लिए कुछ खास नहीं लाया।
-- अक्षय देशवाल बधेव ने कहा कि हाथी के दांत दिखाने के कुछ और हैं और खाने के कुछ और। केंद्र सरकार ने भी ऐसा ही आम बजट पेश किया है। एक तरफ विदेश से चीनी का आयात किया जा रहा है, तो चीनी मिलें गन्ना मूल्य भुगतान नहीं कर रही है। यह आम बजट किसानों के लिए एकदम बेकार है।
किसान नेता अनिल मलिक का कहना है कि किसान को ऋण नहीं फसलों का लाभकारी मूल्य मिलना चाहिए। ऋण के कारण ही किसान आत्महत्या कर रहे हैं। सरकार ने नई मंडियों के लिए खोलने व किसानों की पूर्ण फसल खरीद की। कोई गारंटी नहीं ली। किसानों को डीजल पर छूट देनी चाहिए थी। कृषि शोध केंद्र व किसानों को तकनीकी जानकारी के लिए सरकार ने कोई पहल नहीं की। इस बजट से किसान को कोई लाभ होने वाला नहीं। किसान और ज्यादा कर्ज के बोझ से दबेगा।