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Shamli News: साल्वेंट, केमिकल और केरोसिन ऑयल से तैयार किया जा रहा नकली डीजल-पेट्रोल

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संवाद न्यूज एजेंसी
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शामली। एक दशक के रिकॉर्ड पर नजर डालें तो वाहनों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है। बढ़ते वाहनों के साथ डीजल-पेट्रोल और उससे जुड़े उत्पादों की मांग भी तेजी से बढ़ी है। इसी बढ़ती मांग के बीच नकली तेल के कारोबारियों का नेटवर्क भी फैलता चला गया। पड़ताल में सामने आया है कि साल्वेंट, केमिकल और केरोसिन ऑयल मिलाकर बड़े स्तर पर नकली डीजल और पेट्रोल तैयार किया जा रहा है, जिसकी सप्लाई वेस्ट यूपी, हरियाणा, उत्तराखंड समेत कई राज्यों में हो रही है। पड़ताल के दौरान गिरोह से जुड़े लोगों ने दावा किया कि तैयार किया गया नकली तेल असली पेट्रोल और डीजल में मिलाकर खुलेआम बेचा जा रहा है। यह कारोबार लंबे समय से चल रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग कार्रवाई के बजाय आंखें मूंदे बैठे हैं। कैराना के ऑटो रिपेयरिंग कार्य से जुड़े आजम का कहना है कि जिन वाहनों के इंजन सीज होकर वर्कशॉप पर पहुंचते हैं, उनमें 90 से 95 प्रतिशत मामलों में मिलावटी तेल की शिकायत सामने आती है। वहीं कार इंजीनियर राजेश कुमार का कहना है कि नकली तेल वाहनों के इंजन को पूरी तरह बर्बाद कर देता है। (संवाद)
कहां-कहां फैला है नेटवर्क

पड़ताल में सामने आया कि शामली, बागपत, मुजफ्फरनगर, हापुड़, गाजियाबाद, दिल्ली, करनाल, पानीपत और सोनीपत समेत कई क्षेत्रों में सैकड़ों लोग इस अवैध कारोबार से जुड़े हुए हैं। विभिन्न कंपनियों के टैंकर यहां पहुंचते हैं और असली तेल में मिलावट कर उसे आगे सप्लाई कर दिया जाता है।
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संवाददाता ने पड़ताल के दौरान देखा कि एक टैंकर में केरोसिन ऑयल और साल्वेंट लाया गया। इसके बाद उसमें केमिकल मिलाकर दूसरे स्थान के लिए रवाना कर दिया गया।



ऐसे तैयार होता है नकली डीजल और पेट्रोल

शामली और बागपत से जुड़े दो तस्करों ने बताया कि पेट्रोल में साल्वेंट मिलाया जाता है, जबकि डीजल में केरोसिन ऑयल मिलाकर तैयार किया जाता है। कई जगहों पर काला तेल यानी वेस्टेज मोबिल ऑयल भी मिलाया जाता है।

तस्करों के अनुसार साल्वेंट का घनत्व पेट्रोल के लगभग बराबर होता है, इसलिए यह आसानी से उसमें मिल जाता है। केरोसिन करीब 40 रुपये प्रति लीटर और साल्वेंट करीब 30 रुपये प्रति लीटर में उपलब्ध हो जाता है।

उन्होंने बताया कि मिलावट आमतौर पर 30 से 40 प्रतिशत तक की जाती है। इससे अधिक मिलावट होने पर वाहन में तुरंत समस्या आने लगती है। उदाहरण के तौर पर एक लीटर पेट्रोल तैयार करने में करीब 600 मिलीलीटर असली पेट्रोल और 400 मिलीलीटर साल्वेंट मिलाया जाता है। इस तरह करीब 35 रुपये में तैयार तेल को 70 से 82 रुपये प्रति लीटर तक बेचा जाता है।



विभागीय मिलीभगत का दावा

गिरोह से जुड़े एक व्यक्ति ने दावा किया कि जिला आपूर्ति विभाग और कुछ अन्य कर्मचारियों से उनकी सेटिंग है। उसने आरोप लगाया कि पुलिस और विभागीय कर्मचारियों को रुपये दिए जाते हैं, जिसके चलते शिकायतों के बावजूद कार्रवाई सिर्फ खानापूर्ति बनकर रह जाती है।



पहले भी पकड़े जा चुके हैं मामले

करीब छह माह पहले इस्सोपुर टीला में आपूर्ति विभाग की टीम ने अवैध रूप से संचालित मिनी पेट्रोल पंप पकड़ा था। मामले में मेरठ निवासी सुशांत और चरथावल निवासी पंकज के खिलाफ कांधला थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

चार माह पहले पंजीठ में अपमिश्रित और नकली तेल मामले में कैराना निवासी शकील के खिलाफ कार्रवाई हुई थी। जांच में सामने आया था कि नकली डीजल-पेट्रोल में काला तेल मिलाया जा रहा था।

इसके अलावा बिडौली में ट्रैक्टर-ट्रॉली से बरामद अपमिश्रित पेट्रोल मामले में डीजल माफिया मनोज के खिलाफ कैराना थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

- मिलावटी तेल से ये होते हैं नुकसान
ऑटो मैकेनिक आजम के अनुसार मिलावटी तेल के प्रयोग से वाहन से निकलने वाला धुआं जहरीला हो जाता है। गाड़ी में तेल की खपत बढ़ जाती है। कई बार वाल्व कट जाते हैं, इंजन ज्यादा धुआं छोड़ता है और इंजन सीज होने तक की नौबत आ जाती है। अधिक मिलावट होने पर वाहन चलना भी मुश्किल हो जाता है। रिंग-पिस्टन खराब होने के साथ इंजन की क्षमता भी तेजी से घटती है।
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यह बोले अधिकारी
जिला पूर्ति अधिकारी अंकुर यादव ने बताया कि तेल तस्करी करने वाले गिरोह की तलाश में छह टीमें लगाई गई हैं। पेट्रोल पंपों पर लगातार छापा मारा जा रहा है। जल्द ही पूरे गिरोह का खुलासा कर दिया जाएगा और किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।



नोट : कल के अंक में पढ़िए स्टिंग की अगली किस्त - आबादी के बीच दुकानों और घरों के बाहर खुलेआम बिक रहा डीजल-पेट्रोल, पुलिस और आपूर्ति विभाग बना अनजान।
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