फिर से नए विकल्प की तलाश में जुटे उद्यमी
शामली। पिछले साल प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगा तो डिस्पोजल क्राकरी उद्योग पर संकट के बादल छाए। फैक्टरियां बंद होने लगी। शामली के उद्यमी ने गन्ने की खोई से डिस्पोजल क्राकरी बनाने का विकल्प तलाशा। काम नया था और लागत ज्यादा, लेकिन उद्यमी को अपने अनुभव पर भरोसा था। हिम्मत दिखाई और बैंक से लोन लेकर प्लांट लगा लिया। काम भी सही निकल गया। बैक लोन की किस्तें भी समय पर जा रही थी। हालांकि कोरोना महामारी के चलते मार्च में लॉकडाउन के बाद बने हालात से फैक्टरी बंदी के कगार पर पहुंच गई है। हालत ये हो गई है कि एक साल में ही उद्यमी को दूसरा विकल्प तलाशने की नौबत आ गई। कई उद्योग इसी हालत से गुजर रहे हैं। पेश है रिपोर्ट...
अनुभव और हिम्मत के दम पर लगाया था प्लांट
शहर के उद्यमी संदीप गर्ग के अनुसार उनकी 26 साल से इंडस्ट्रीयल एरिया में लकड़ी की चम्मच बनाने की फैक्टरी थी। पिछले साल प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगा तो प्लास्टिक से डिस्पोजल क्राकरी बनाने वाली फैक्टरी बंद होने लगी। उनके काम पर भी असर पड़ा तो उन्होंने गन्ने की खोई की लुगदी शादी विवाह में काम आने वाली डिस्पोजल क्राकरी बनाने की फैक्टरी लगाई। उत्तराखंड के लाल कुंआ से लुगदी मार्केट से कच्चा माल का मार्केट तलाशा। प्रोजेक्ट महंगा था, लेकिन ये आइटम ऐसा था कि कभी प्रतिबंधित नहीं होता। काम भी साल भर चलने वाला था। अपने पारिवारिक कारोबारी अनुभव और हिम्मत से बैंक से 1.12 करोड़ का लोन लेकर प्लांट लगा लिया।
शादी विवाह बंद, 50 लाख का माल डंप
बकौल संदीप उनका काम अच्छा चल गया। माल की काफी मांग थी। इस साल फरवरी से मई तक लंबे शादी के साए थे, इसलिए शादियों के लिए फैक्टरी में काफी माल पहले से ही तैयार कर लिया था, लेकिन 24 मार्च को लॉकडाउन लग गया। पूरे देश में शादी विवाह, बडे़ समारोह सब बंद हो गए और उनकी फैक्टरी में तैयार करीब 50 लाख का स्टॉक बचा रह गया। ये माल आज गोदामों में डंप हो गया है।
....तो फिर तलाशना होगा दूसरा काम
फैक्टरी के लिए बैंक से लिए गए 1.12 करोड़ के लोग पर 1.85 लाख की हर महीने किस्त जाती है। उद्यमी के अनुसार काम ठीक था तो फरवरी तक की किस्त भी जमा की, लेकिन मार्च से काम बंद है तो किस्त भी जमा नहीं हो सकी। सरकार ने अगस्त तक किस्त जमा करने के लिए छूट दी है, लेकिन इसका कोई लाभ नहीं है। बाद में ब्याज सहित पूरी जमा करनी होगी। अब तो ये हालत हो गई है कि एक साल बाद ही उन्हें दूसरा काम तलाशने को मजबूर कर दिया है।
छह महीने का ब्याज माफ करे सरकार
लोन की किस्त छह माह के लिए स्थगित की गई है, लेकिन छह महीने बाद तो ब्याज के साथ इसे एक साथ जमा करना होगा। वर्तमान हालत में उद्यमी एक महीने की किस्त देने में भी असमर्थ है। ऐसे में वो छह महीने की किस्त एक साथ कैसे देगा। बेहतर जब होगा जब सरकार छह महीने का ब्याज माफ करे। - मयंक जैन, पूर्व अध्यक्ष इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
सरकार समझे उद्यमियों की समस्या
सरकार या तो उद्यमियों की समस्या या तो समझ नहीं रही या समझना नहीं चाहती। सबको पता है आज उद्योगों की समस्या पूंजी की उपलब्धता की है। क्योंकि पुराना माल बिक नहीं रहा और नया आ नहीं रहा। उद्योगों की मांग ब्याज में छूट से है, जिसका सीधा लाभ उद्योगों को मिलेगा। - अशोक बंसल, संरक्षक इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
शामली में बंद पडी गन्ने की खोई से डिस्पोजल क्राकरी बनाने की फैक्ट्री- फोटो : SHAMLI