हौसला देके उनको उड़ने का, इक नया आसमान देते हैं
शामली। शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में व्हाट्सएप के माटी की सुगंध समूह की ओर से ऑनलाइन कवि सम्मेलन में दिल्ली से आए राष्ट्रीय गीतकार डॉ. जयसिंह आर्य ने कहा कि अपने शिष्यों को ज्ञान देते हैं, उनके पंखों को जान देते हैं। हौसला देके उनको उड़ने का, इक नया आसमान देते हैं।
ऑनलाइन कवि सम्मेलन का शुभारंभ शामली के हास्य कवि एवं सौम्य गीतकार सुनील अरोरा टम्मी ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत करके किया। पानीपत से आए कवि अनुपिंद्र सिंह अनूप अपनी कविताओं में यूं कहा कि जो दिल से अपने गुरुओं का, सदा सम्मान करते हैं, वही हासिल हमेशा गुरुओं से वरदान करते हैं। पानीपत के दूसरे कवि केसर कमल शर्मा ने कहा कि दोष घड़े का दूर भगाया, चोट मारकर खूब दिखाया। अतिशय गुण गिनवाऊं मैं, गुरू की महिमा गाऊं मैं, नारनौल से आईं कवि डॉ. कृष्णा आर्य ने हरियाणवी शैली में गुरू को समर्पित लोक गीत सुनाए। कहा कि नाम तेरा साथ चलेगा, वो ही उतारे भव से पार, गुरूजी मेरे मन में, तन में, हिरदै में बस गयो थारो नाम। प्रीतम सिंह प्रीतम ने सुनाया गुरू की शरणां के बिन जीवन, रहता इखरा-बिखरा, खुद से खुद में तुष्टि नहीं तो, खुद को अखरा-अखरा।
असंध के कवि भारत भूषण वर्मा की कविता की बानगी गुरुओं का स्थान है सर्वोपरि, ये गीत युगों ने गाए हैं, ज्ञान से गुरू जग में, ब्रह्मा, विष्णु, शिव कहलाए हैं। सुनील अरोरा टम्मी ने कहा कि दीपक सा जलकर राह दिखाए, फूल सा खिल जीवन महकाये। श्रीकृष्ण निर्मल दिल्ली ने अपनी कविता पढ़ी, गुरूजन यदि न तराशते, आता नहीं निखार, और न आ पाती कभी, निर्मल वस्त्र बहार। नीरज कुमार द्विवेदी बस्ती, राजकुमार अरोड़ा बहादुरगढ़, नरेश कुमार शामली, ओमप्रकाश श्रीवास्तव दतिया मध्यप्रदेश, डॉ. पंकज वासिनी पटना, संतोष त्रिपाठी इंदौर और तरुणा सिंह पुंडीर तरुनिल दिल्ली ने भी उत्कृष्ट काव्यपाठ किया। मौके पर तेजवीर त्यागी अलीगढ़, आकाश देहलवी, अनिल पोपट कामचोर, प्रदीप मायूस, बृजेश सैनी आदि कविगण भी श्रोता बनकर मौजूद रहे। संचालन शामली के कवि प्रीतम सिंह प्रीतम ने किया।