हिंदी हैं हम...कवि विनोद अश्क।
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शामली। कवि विनोद अश्क हिंदी की वर्तमान स्थिति को लेकर आहत हैं। उनका कहना है कि हर स्तर पर हिंदी की उपेक्षा हो रही है। कलेवर बदल लेने से हृदय परिवर्तन नहीं हो जाता। सभी का दायित्व है कि मन में रखने के साथ ही हिंदी को व्यवहार में भी लाएं। उन्होंने कहा कि सरकार हिंदी को रोजगार से जोड़कर और अधिक उपयोगी बनाए।
वीवी पीजी कॉलेज के अंग्रेजी विभागाध्यक्ष पद से सेवानिवृत्त कैराना रोड गगन विहार निवासी विनोद अश्क ने अमर उजाला से बातचीत करते हुए कहा कि हिंदी शिक्षण का स्तर गिरा है। शिक्षक गैस पेपर से कक्षाओं में पढ़ाते हैं। जब शिक्षक की यह स्थिति है तो छात्रों से क्या उम्मीद की जा सकती है। प्राथमिक स्तर से लेकर स्नातक और परास्नातक स्तर तक हिंदी पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। उत्तर प्रदेश बोर्ड में छात्रों के हिंदी विषय में फेल होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि स्थिति बेहद खराब हो रही है। अन्य प्रदेशों में तो इससे भी बुरा हाल है।
शिक्षक, अभिभावक और युवा पीढ़ी सभी को मिलकर हिंदी को ऊंचाइयों पर ले जाना होगा। करीब साढ़े 36 साल अंग्रेजी विषय में अध्यापन करने के बावजूद हिंदी और उर्दू में लेखन के सवाल पर उन्होंने कहा कि हिंदी हमारी मातृभाषा है। कलेवर बदल लेने से हृदय परिवर्तन नहीं हो जाता। मन में हिंदी को लेकर प्रेम है इसलिए हिंदी और उर्दू में लिखते हैं। वह कहते हैं कि सरकार को भी हिंदी के विकास के लिए मजबूत कदम उठाने होंगे। अंत में वर्तमान हालात पर इशारा करते हुए कहते हैं ‘उसी मिट्टी से क्यों सहमा हुआ हूं मैं, जिसकी कोख से पैदा हुआ हूं मैं।