शामली। इकलौते बेटे के अपहरण का आघात पिता के लिए आज भी उतना ही जितना घटना के समय था। पुलिस से लेकर हाईकोर्ट और सीबीआई तक की जांच के बावजूद बेटे का सुराग नहीं लगने से यह जख्म और गहराता जा रहा है। पिता बेहद निराशा से कहते हैं कि दस साल पहले जिस जांच जहां से शुरू हुई थी, आज भी वहीं खड़ी है। न तो उनका बेटा मिल सका और न ही उसके अपहरणकर्ताओं को सजा मिल पाई।
दस साल पहले 15 अप्रैल 2011 को हुए अनमोल अपहरण की फाइलों पर भले ही धूल जम रही हो, लेकिन मां-बाप के जख्म हरे हैं। अनमोल के पिता मोहल्ला गांधीगंज निवासी घी व्यापारी मनोज रोज की तरह अपनी दुकान पर आते हैं, लेकिन बेटे के जुदा होने का गम उनका पीछा नहीं छोड़ता। वे बताते हैं कि स्थानीय पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था, लेकिन वे जमानत पर छूट गए। इस गिरफ्तारी से भी उनके बेटे का कुछ पता नहीं चल सका।
सीबीआई ने भी इस मामले में 2018 में फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी, जिसके खिलाफ उन्होंने सीबीआई कोर्ट गाजियाबाद में केस दर्ज किया। 2019 में कोर्ट ने फिर से जांच के आदेश दिए। तब से जांच का दौर एक बार फिर शुरू हो गया। वह हर माह सीबीआई के अधिकारियों से बात करते हैं, लेकिन जवाब यही मिलता है कि जांच चल रही है।
---------
आरोपियों के नारको टेस्ट की मांग
शामली। व्यापारी मनोज गोयल का कहना है कि वह आरोपियों के नारको टेस्ट की मांग कर रहे हैं। सीबीआई कोर्ट में इस मांग को लेकर पैरवी कर रहे हैं।
---------------------
यह था मामला...
शहर के मोहल्ला गांधीगंज निवासी घी व्यापारी मनोज गोयल के पुत्र अनमोल उर्फ संयम का 16 वर्ष की उम्र में 15 अप्रैल 2011 की शाम ट्यूशन जाते समय अपहरण कर लिया गया था। रात में परिजनों के पास फिरौती के लिए फोन आया। उस समय अनमोल इंटर का छात्र था। पुलिस ने इस मामले में शहर के एक व्यापारी को पकड़ा था, लेकिन अपहृत छात्र और अपहरणकर्ताओं का पता नहीं चल सका था। सितंबर 2014 को हाईकोर्ट ने केस की जांच सीबीआई को सौंपी थी।