शामली। उप्र केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट फेडरेशन के आह्वान पर जिले के केमिस्ट ड्रिगिस्ट फेडरेशन के जिलाध्यक्ष के नेतृत्व में दवा विक्रेताओं ने कलक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। पीएम और सीएम के नाम ज्ञापन डीएम को सौंपकर मांगों को पूरा करने की गुहार लगाई।
जिलाध्यक्ष सुभाष तोमर और सचिव दीपक गुप्ता ने ज्ञापन ने बताया कि उत्तर प्रदेश राज्य में दवा व्यवसाय से जुडे़ 125 लाख केमिस्टों की संस्था केमिस्ट एवं ड्रगिस्ट फेडरेशन उत्तर प्रदेश की ओर से कई बार पत्रों एवं भेंट वार्ताओं के जरिए खुदरा दवा प्रतिष्ठानों पर फामेसिस्टों की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग की गई है। अभी तक इसका समाधान नहीं हो सका है।
खुदरा दवा दुकानों को ड्रग एंड केमिस्ट रूल 1945 के नियम 61 एक व 61 दो के तहत फार्म 20-21 में अनुज्ञप्ति औषधियों के विक्रय हेतु भंडारण या आपूर्ति हेतु दी जाती है। न कि औषधियों के निर्माण कंपपोडिंग के जैसा फोरमेट 20-21 में अंकित है। दो दशक पूर्व दवा दुकानों में आरएमपी द्वारा दवा निर्माण के प्रावधानों के तहत आ जाता था। जिसमें फार्मेस्टि की अनिवार्यता थी, बाद में भारत सरकार के आदेशनुसार सभी दुकानों से फार्मेसी शब्द हटा लिया गया था।
सरकारी अस्पताल से भी डिस्पेंसरी शब्द हटा दिया गया, अभी तक दवाओं का कंपोडिंग मिक्सर आदि नहीं किया जाता है।ज्ञापन में दवा विक्रेता के यहां से फार्मेसिस्ट की अनिवार्यता समाप्त किए जाने फार्मेसी एक्ट बदलने, जीवन रक्षक दवाओं को सुलभता से उपलब्ध किए जाने की मांग की है।
इस मौके पर सुभाष तोमर, दीपक, कुलदीप, पंकज गुप्ता, संजय, पवन संगल, राजेंद्र, अमित जिंदल, योगेश, अमित, नवीन मौजूद रहे।