वहीं, प्राइवेट व रोडवेज बस के चालक भी हड़ताल पर रहे। चालकों ने कहा कि इस कानून में बसों व ट्रकों को चलाने में बहुत दिक्कत होगी। कोई भी ड्राइवर गाड़ी नहीं चला पाएगा। 10 साल की सजा के साथ 10 लाख का जुर्माना देना बड़ा मुश्किल होगा। वहीं, चालकों ने कहा कि हिट एंड रन के मामले में मौके पर रुकना जोखिम भरा रहता है। क्योंकि बिना गलती भी जनता ड्राइवर को मारपीट कर बुरी तरह से घायल कर देते हैं। इसलिए सरकार को इस कानून को वापस लेना चाहिए।
शामली से कैराना, कांधला, झिंझाना, थानाभवन, जलालाबाद कस्बों में जाने के लिए सवारियों ने ई-रिक्शा और टेंपो का सहरा लिया। यात्रियों से दो से लेकर तीन गुणा तक किराया लिया गया। उधर कुछ यात्रियों ने ट्रेनों का भी सहारा लिया। रेलवे को करीब 25 प्रतिशत अधिक आय हुई।
यूपी रोडवेज के शामली बस अड्डे के वरिष्ठ केंद्र प्रभारी राजेंद्र चौहान ने बताया कि जिले से जाने वाली 44 रोडवेज बसों का संचालन नहीं हुआ। रोडवेज बसों से प्रतिदिन करीब पांच लाख की आमदनी होती है। इसके अलावा 49 मिनी बसें भी नहीं चल सकी। इसके अलावा सहारनपुर, मेरठ, मुजफ्फरनगर और अन्य डिपो से आने वाली बसें भी शामली से होकर नहीं गई।
लोनी से शामली तक संचालित होने वाली 49 मिनी बसों के एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश राणा का कहना है कि 49 मिनी बसों से प्रतिदिन एक लाख रुपये की आय होती है। चालकों की तीन दिवसीय हड़ताल से सवारियों को परेशानी हुई। मुजफ्फरनगर- शामली, कैराना, ऊन चौसाना झिंझाना, शामली- बुढाना, शामली- सिसौली, भौराकंला, शामली- गंगोह, शामली गढ़ीपुख्ता ऊन आदि में 150 से ज्यादा बसें संचालित होती है, जो नहीं आ सकी।
750 ट्रक हड़ताल में फंसे
शामली आईआईए के चेयरमैन आशीष जैन ने बताया कि हड़ताल से शामली से हरियाणा- पंजाब, उत्तराखंड एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलो के बागपत- शामली, सहारनपुर में 750 ट्रक हड़ताल में फंस गए हैं। जिसे व्यापार भी प्रभावित होगा।
दूध, सब्जी और फल की आपूर्ति पर पड़ेगा असर
सब्जी आढ़ती बाबूराम सैनी ने बताया कि सोमवार को सुबह दिल्ली से फल- सब्जी कम संख्या में आई है। मंगलवार को ट्रक और टेंपो चालकों की हड़ताल से दिल्ली और दूसरे राज्यों से फल सब्जी नहीं आएगी। जिससे रेट पर भी फर्म पड़ सकता है।
30 घंटे में बाजपुर से शामली पहुंचा
भाजपा नेता राजन बत्रा ने बताया कि उनकी फैक्टरी का एक कर्मचारी उत्तराखंड में बाजपुर में एक रस्म पगड़ी में गया था। वह रविवार को दोपहर बाद बाजपुर से चला। किंतु बस चालकों की हड़ताल के कारण शाम को शामली पहुंचा। करीब 30 घंटे का समय लगा। मुन्नी देवी करनाल जाने के लिए बस का इंतजार बस अड्डे पर कर रही थी। बड़ौत की महिला सोहनवीरी अपने पुत्र के साथ शामली आई। बसों की हड़ताल से शामली बस अड्डे पर निगम की बस का इंतजार करती रही।
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