सुरेश देवी। उनके बेटे भूपेंद्र और पोते अर्जुन की फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला
इकलौते बेटे भूपेंद्र और इकलौते पोते अर्जुन की हत्या के मामले में दोषियों को आजीवन कारावास की सजा मिलने से सुरेश देवी संतुष्ट नहीं है। हत्यारों को फांसी दिलाने के लिए अब हाईकोर्ट में अपील करेंगी। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़ूंगी।
भूपेंद्र व अर्जुन की फाइल फोटो। जेल जाते हत्यारे।
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6 अप्रैल 2022 को कांधला के मखमूलपुर में मेरठ के कंकरखेड़ा निवासी भूपेंद्र और उनके बेटे अर्जुन की पैसों के विवाद में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मामले में भूपेंद्र की मां सुरेश देवी ने कांधला थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। वह मुकदमे की वादी होने के साथ घटना की चश्मदीद गवाह भी थीं।
सोमवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार राय ने मामले में बर्खास्त सिपाही विक्रांत, उसके भाई अर्जुन और चचेरे भाई मोनू को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। विक्रांत के पिता वीरेंद्र को पांच साल के कारावास की सजा दी गई।
सुरेश देवी ने बताया कि बेटे और पोते की हत्या के बाद उनका पूरा परिवार उजड़ गया। भूपेंद्र डेयरी चलाता था। उसकी हत्या के बाद डेयरी का काम बंद हो गया और भैंसें बेचनी पड़ीं। घर में अब वह, उसकी विधवा पुत्रवधू और 15 वर्षीय पोती रह गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें पहले धमकियां भी दी गईं, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
सुरेश देवी ने कहा कि दोषियों को आजीवन कारावास की सजा से वह संतुष्ट नहीं हैं। मेरी कोख और मेरा घर उजाड़ने वालों को फांसी की सजा दिलाने के लिए हाईकोर्ट जाऊंगी। जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ूंगी।
ये है मामला
मेरठ के कंकरखेड़ा स्थित सैनिक विहार कॉलोनी निवासी सुरेश देवी ने 6 अप्रैल 2022 की रात कांधला थाने पर एफआईआर दर्ज कराई थी। बताया था कि यूपी पुलिस से बर्खास्त सिपाही विक्रांत निवासी मखमूलपुर, थाना कांधला से उनके बेटे भूपेंद्र ने दो लाख रुपये लिए थे। 50 हजार रुपये लौटा दिए थे, मगर विक्रांत ने 5.80 लाख रुपये की मांग की थी।
पांच अप्रैल 2022 को भूपेंद्र और उनकी मां सुरेश देवी को विक्रांत ने अपने गांव मखमूलपुर बुलाया था, जहां विक्रांत और उसके परिवार के लोगों ने भूपेंद्र और उसकी मां सुरेश देवी की पिटाई की। अगले दिन भूपेंद्र के इकलौते बेटे अर्जुन को भी मखमूलपुर बुला लिया गया। इसके बाद सुरेश देवी को पैसे लाने के लिए भेजा था, जबकि भूपेंद्र और उसके बेटे अर्जुन को बंधक बनाकर यातनाएं दी थीं।
सुरेश देवी ने अपने बेटे और पोते को बचाने के लिए डायल-112 पुलिस को मौके पर बुला लिया था, लेकिन पुलिस की मौजूदगी में ही आरोपी घायल भूपेंद्र और उनके बेटे अर्जुन को जबरदस्ती गाड़ी में डालकर ले गए थे। डायल-112 पुलिस को कहा था कि इन्हें थाने लेकर जा रहे हैं। बाद में आरोपियों ने पिता-पुत्र को सल्फा के जंगल में ले जाकर गोलियां मारकर हत्या कर दी थी।
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