सुरेश देवी। उनके बेटे भूपेंद्र और पोते अर्जुन की फाइल फोटो।
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Verdict on the 17th: मेरठ के कंकरखेड़ा निवासी भूपेंद्र और उनके बेटे अर्जुन की हत्या के मामले में अदालत ने चार हत्यारों को दोषी करार दिया। 17 अगस्त को सजा सुनाई जाएगी। पीड़ित परिवार ने हत्यारों को फांसी देने की मांग की है।
मृतक भूपेंद्र की मां सुरेश देवी ने फोन पर बताया कि जालिमों ने उनका घर उजाड़ दिया। उनके इकलौते बेटे भूपेंद्र और इकलौते पोते अर्जुन की बेरहमी से पिटाई करने के बाद गोली मारकर हत्या कर दी गई। उन्होंने बताया कि पिटाई का वीडियो भी उनके पास है। वह खुद विधवा हैं और हत्या के बाद उनकी पुत्रवधू दुर्गेश भी विधवा हो गई। घर में अब उनके अलावा पुत्रवधू और छोटी पोती ही बची हैं। उन्होंने आरोपी विक्रांत और उसके भाई अर्जुन को फांसी की सजा देने की मांग की।
दहशत के कारण कई दिन तक घर से नहीं निकले परिजन
पिता-पुत्र की हत्या के बाद परिवार में दहशत का माहौल था। सुरेश देवी ने बताया कि हत्याकांड के बाद करीब एक सप्ताह तक परिवार के सदस्य घर से बाहर नहीं निकले। उन्हें डर था कि कहीं परिवार के अन्य सदस्यों की भी हत्या न कर दी जाए।
आईबी के पूर्व निदेशक की सुरक्षा में तैनात था सिपाही विक्रांत
अप्रैल 2022 में कांधला के गांव मखमूलपुर निवासी यूपी पुलिस का सिपाही विक्रांत आईबी के पूर्व निदेशक सैयद आसिफ इब्राहिम की सुरक्षा में तैनात था। उसे सर्विस पिस्टल मिली हुई थी। हत्याकांड से पहले विक्रांत ड्यूटी से गायब हो गया था। बाद में कांधला पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। उसके पास से सर्विस पिस्टल और हत्या में प्रयुक्त हथियार बरामद हुए थे। बाद में शासन ने विक्रांत को बर्खास्त कर दिया था।
पत्नी और मां की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने तोड़ा था गेट
पिता-पुत्र की हत्या के बाद सुरेश देवी ने कांधला थाने में सिपाही विक्रांत, उसकी पत्नी शिवानी, मुदरेश, भाई अर्जुन, पिता वीरेंद्र और मोनू के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। विक्रांत की पत्नी और मां की गिरफ्तारी के लिए पुलिस उसके मकान पर पहुंची थी। गेट नहीं खोलने पर पुलिस ने जेसीबी से मकान का लोहे का गेट तोड़ दिया था और दोनों को गिरफ्तार किया था।
दो सिपाही हुए थे निलंबित
6 अप्रैल 2022 को सुरेश देवी ने डायल-112 पर फोन कर बताया था कि उनके बेटे और पोते को मखमूलपुर गांव में बंधक बनाकर पीटा जा रहा है। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची थी। आरोप है कि पुलिस की मौजूदगी में ही भूपेंद्र और अर्जुन को गाड़ी में डालकर यह कहते हुए ले जाया गया कि उन्हें थाने ले जा रहे हैं। इसके बाद दोनों की गोली मारकर हत्या कर शव सल्फा के जंगल में डाल दिए गए। ड्यूटी में लापरवाही के आरोप में सिपाही रजत कुमार और मोनू को निलंबित किया गया था।
पिता के इकलौता बेटे थे भूपेंद्र, अर्जुन भी था इकलौता
मूल रूप से सरधना के गांव छूर निवासी 45 वर्षीय भूपेंद्र के पिता बिजेंद्र की पहले ही मृत्यु हो चुकी थी। भूपेंद्र अपने पिता के इकलौता बेटे थे। भूपेंद्र की 15 वर्षीय बेटी शगुन और 20 वर्षीय बेटा अर्जुन था। अर्जुन उनका इकलौता बेटा था। दोनों की हत्या के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। मृतक की मां सुरेश देवी और बेटी शगुन के सामने परिवार की जिम्मेदारी आ गई।
14 गवाहों के बयान कराए गए
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 14 गवाह पेश किए गए। बृहस्पतिवार को न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार राय ने विक्रांत, अर्जुन, वीरेंद्र और मोनू को हत्या का दोषी करार दिया। अदालत अब 17 अगस्त को चारों दोषियों की सजा पर फैसला सुनाएगी।
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