मत करो मौत का सफर, बड़ा अनमोल है आपका जीवन
शामली। यातायात माह और सड़क सुरक्षा सप्ताह के दौरान स्कूल कालेजों में रोजाना गोष्ठियां, कार्यक्रम हो रहे हैं। उन्हें यातायात नियमों का पाठ सिखाया जा रहा है, लेकिन स्कूल से बाहर निकलते ही यही छात्र यातायात नियमों को ताक पर रखकर मौत का सफर करते हैं। कोई बस की खिड़की पर लटकता है तो कोई पीछे जाल पर। चलती बस में चढ़ना तो मानो इसका शौक है। लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करने के अपने अभियान के तहत शनिवार को हमने शहर की सड़कों का जायजा लिया तो हाल चौंकाने वाला था। स्कूल की छुट्टी के बाद छात्र बस, ऑटो पर मौत का सफर करते नजर आए, ये इस हालत में थे कि जरा भी चूक होते ही बड़ा हादसा होने में देर नहीं थी। अभिभावक और स्कूूल संचालकों को भी इस तरफ ध्यान देना होगा क्योंकि जीवन बड़ा अनमोल है।
पायदान और जाल पर लटककर मौत का सफर
शहर के बुढ़ाना रोड पर दोपहर में जैसे ही बढ़ाना की ओर जाने वाली बस आई तो वहां सड़क किनारे खड़े करीब 40 से ज्यादा छात्र बस की ओर दौडे़ कुछ बस के अंदर चढ़ गए, लेकिन बस भर गई थी। चालक बस को ले जाने लगा तो चलती बस की खिड़की के पायदान पर ही बसते लटकाए छात्र लटक गए । बस के पीछे छत पर चढ़ने का सीढ़ी नहीं लगी थी, लेकिन इसके बावजूद करीब 20 छात्र बस के जाल पर ही लटक गए । ये सफर तो बेहद जोखिम भरा था लेकिन शायद इनके परिजनों को ये जानकारी ना हो।
शार्टकट के चक्कर में जान जोखिम में
दोपहर में बुढ़ाना रोड पर फाटक बंद था, तो कुछ छात्रों ने तो रेलवे लाइन ही पार करनी शुरू कर दी। अपनी साइकिलों को उठाकर रेलवे ट्रक पार करना ही शुरू कर दिया था। कुछ शार्टकट के चक्कर में इधर उधर से निकलने लगे, इन्हें शायद ये नहीं पता था कि थोड़ी सी जल्दबाजी उन्हें भारी पड़ सकती है।
चलती बस में दौड़कर चढ़ना तो शौक ही बन गया
शहर के गुरुद्वारा से मुजफ्फरनगर के लिए जैसे ही एक बस चली पीछे से आ रहे स्कूली छात्रों ने तेजी से दौड़ लगी और चलती बस में चढे़। कुछ छात्र आगे लटककर खिड़की से चढे़ तो कोई पीछे की खिड़की से चढे़। एक छात्र का तो नीचे गिरने से भी बचा, लेकिन इन्हें कोई चिंता नहीं थी और मजे से बस में चढ़कर चलते बने। आसपास के लोगों का कहना था कि ये तो रोज का काम है।
ऑटो पर भी लटककर
दोपहर में मेरठ रोड पर जा रहे एक ऑटो में कई छात्र लटके थे। ऑटो के अंदर सवारियां बैठी थी और उसकी दोनों खिड़कियों पर छात्र ही लटके हुए थे। कुछ छात्र हाथ में स्कूल बैग भी थे। कुछ ने आटो की छत पर बैग रखे थे। पायदान पर भी छात्र लटके थे। इन्हें अपनी जान की कोई परवाह नही थी कुछ तो पूरी मस्ती के मूड में थे। कुछ जगह छात्र ट्रैक्टर ट्रॉलियों में सवारी ढोते नजर आए।
यातायात नियमों का पालन कराने के लिए जागरूकता गोष्ठियां रैलियां हो रही हैं, लेकिन इन सबके लिए जनसहयोग जरूरी है। अभिभावकों को इसमें ठोस कदम उठाने चाहिए। देखना चाहिए कि उनका बच्चा किस तरह स्कूल आ जा रहा है। नाबालिग बच्चों को वाहन ना दें। यदि वह बस या ऑटो से स्कूल आते जाते हैं तो उन्हें समझाएं कि इस तरह जान जोखिम में डालकर सफर ना करें।
भंवर सिंह ,यातायात निरीक्षक शामली