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Shamli News: एंटी रेबीज का कोर्स न छोड़ें अधूरा, वरना जान का खतरा पूरा

Sat, 26 Jul 2025 12:32 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
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शामली। कुत्ता काटने के बाद उपचार में लापरवाही भारी पड़ रही है। एंटी रेबीज इंजेक्शन का कोर्स पूरा नहीं करने पर पिछले एक महीने में रेबीज से नौ वर्षीय बालक और उत्तराखंड के हेड कांस्टेबल समेत तीन लोगों की मौत हो चुकी है। यानी एंटी रेबीज का इंजेक्शन नहीं लगवाने पर खतरा पूरा रहता है। जिले में कुत्ते के काटने से कई मौत हो चुकीं हैं। रोजाना 250 से ज्यादा लोग कुत्ते व बंदर काटने से घायल हो रहे हैं, लेकिन अधिकारी इस तरफ ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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जिले में आवारा व पालतु कुत्तों का आतंक बढ़ता रहा है। गली, मोहल्लों और सड़काें पर कुत्ते झुंड के रूप में रहते हैं, जो आते जाते लोगों पर हमला कर घायल कर रहे हैं। कुत्ते व बंदर काटने से पीड़ित 250 से ज्यादा लोग रोजाना जिला अस्पताल व अन्य सरकारी अस्पतालों में एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने पहुंचते हैं। कुत्ता काटने के बाद लोग एंटी रेबीज इंजेक्शन का पूरा कोर्स नहीं कराते और एक या दाे एंटी रेबीज इंजेक्शन ही लगवाकर बीच में इलाज छोड़ देते हैं, जो बाद में जिंदगी के लिए घातक हो जाता है।
सीएचसी के चिकित्सक बिजेंद्र सिंह का कहना है कि कुत्ता काटने पर जल्द से जल्द एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाना चाहिए। एंटी रेबीज इंजेक्शन कुत्ते काटने से बने जख्म के आधार पर लगाए जाते हैं। उनका कहना है कि कम से कम तीन एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाए जाने चाहिए। अगर घाव ज्यादा है तो पांच एंटी रेबीज इंजेक्शन और छाती, गले या मुंह पर जख्म हो तो सीरम भी लगवाना चाहिए।
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- नसबंदी अभियान भी अधूरा
पालिका ने 1800 कुत्तों की कराई थी नसबंदी
शामली। नगरपालिका ने पिछले साल सड़कों व गलियों में घूमने वाले आवारा कुत्तों की नसबंदी करने का अभियान चलाया था। अभियान के तहत 1800 कुत्तों की नसबंदी कराई गई थी। लव फॉर लाइफ चैरिटेबल संस्था को नसबंदी करने का ठेका दिया गया था। प्रति कुत्ता 1100 रुपये का भुगतान पालिका ने किया था। पालिका अधिकारियों ने शहर में आवारा कुत्तों की जनसंख्या बढ़ने से रोकने के लिए यह कार्यक्रम चलाया था। पालिका अधिकारियों का कहना था कि नसबंदी के दौरान कुत्ते को एंटी रेबीज इंजेक्शन भी लगाए गए थे। नसबंदी के बाद कुत्ता न तो भौंकता और काटने की उम्मीद भी कम रहती है। इस साल बोर्ड में प्रस्ताव पास न होने के कारण आवारा कुत्तों की नसबंदी का अभियान नहीं चल सका। उधर, पालिका में कुत्तों के पंजीकरण की कोई व्यवस्था भी नहीं है।
जिले में एंटी रेबीज के कारण मौत के मामलों की बानगी
24 जून को कांधला के मोहल्ला रायजादगान निवासी चाय विक्रेता राजीव शर्मा (55) की रेबीज से हुई मौत, 34 दिन पहले कुत्ते ने काटा था। परिजनों ने दावा किया था कि एंटी रेबीज इंजेक्शन का कोर्स पूरा किया था।
24 जुलाई को कांधला के गांव डुढार में नौ वर्षीय बालक त्रिदेव की मौत, चार माह पहले कुत्ते ने काटा था। परिजनों ने एंटीरेबीज के दो इंजेक्शन लगवाए थे।
तीन जुलाई को गांव पेलखा निवासी उत्तराखंड के हेड कांस्टेबल दीपक कुमार (44) की कुत्ते काटने के संक्रमण से मौत हुई, चार दिन पहले कुत्ते ने काटा था। वह लिवर की बीमारी से भी पीड़ित था।
दो जनवरी को कैराना के मोहल्ला गुलशननगर निवासी एलएलबी के छात्र जावेद (25) की रेबीज मौत हुई। ढ़ाई माह पहले पानीपत से लाए गए पालतू कुत्ते ने काटा था। एंटी रेबीज का एक इंजेक्शन लगवाया गया था।
कोट
जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में एंटी रेबीज के इंजेक्शन उपलब्ध है। कुत्ता या बंदर काटने पर जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचकर चिकित्सक की सलाह से एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने चाहिए। इसमें लापरवाही न करनी चाहिए। - डॉ. अनिल कुमार, सीएमओ।
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