शामली। डेंगू से बचाव के लिए जागरूकता कार्यक्रम तो खूब चलते हैं, मगर चौंकाने वाली बात है कि जिले में स्वास्थ्य विभाग के पास डेंगू की जांच की सुविधा तक नहीं है।
मंगलवार को विश्व डेंगू दिवस मनाया गया। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या सिर्फ जागरूकता से ही काम चल जाएगा। क्योंकि जिले के यमुना खादर क्षेत्र में डेंगू और बुखार का प्रकोप रहता है तथा कई लोगों की मौत तक हो चुकी हैं।
शामली जिले में बीते वर्ष ही बड़ी संख्या में बुखार के मरीज अस्पतालों में पहुंचे थे। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने कुछ मरीजों के ब्लड की जांच कराई, तो उनमें से दस मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई थी। उनकी जांच सहारनपुर तथा मेरठ से कराई गई थी। एक साल बीत गया और अब बुखार का सीजन एक बार फिर से सिर पर आ गया है, लेकिन इस बार भी स्वास्थ्य विभाग के पास जागरूकता के अलावा डेंगू से निपटने के लिए ठोस प्लान नहीं है।
डेंगू एडीज एजिफसीआई उर्फ टाइगर नामक मच्छर के काटने से होता है। यह मच्छर साफ पानी में पैदा होता है और बाल्टी, गमला, फ्रिज, ड्रिप पैन, घड़े में एकत्रित पानी में पैदा होता है। अचानक तेज बुखार आना, पूरे शरीर में दर्द, जोड़ों में दर्द। इसके अलावा शरीर में दाने निकलना, यदि प्लेटलेट्स एक लाख से कम हो जाएं, इसके लक्षण हंै।
अफसरों को अवगत कराया
यदि शामली जिले में किसी मरीज की डेंगू की जांच करानी है तो स्वास्थ्य विभाग के पास सिर्फ एनएस-1 कार्ड है। इस कार्ड से मरीज की अनुमानित जांच की जा सकती है। इसमें पॉजिटिव आने के बाद ही मरीज की दूसरी जांच के लिए ब्लड सैंपल मेरठ या सहारनपुर स्थित सरकारी पैथालॉजी लैब भेजा जाता है, वहीं पर डेेेंगू की जांच की जाती है।
जिला मलेरिया अधिकारी विनय कुमार का कहना है कि डेंगू से निपटने के लिए दवाइयां उपलब्ध हैं, साथ ही जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। डेंगू की जांच सिर्फ कार्ड से की जा रही है, इसके बाद ब्लड सैंपल जांच के लिए मेरठ अथवा सहारनपुर भेजा जाता है। उच्चाधिकारियों को इससे अवगत करा दिया गया है। जिले में बीमारी से बचाव के और इंतजाम कराए जाएंगे।
जागरूकता से होगी डेंगू की रोकथाम
शामली। नेशनल डेंगू डे पर जलालपुर के मदन मोहन मालवीय इंटर कॉलेज में स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची और छात्र-छात्राओं को डेंगू के प्रति जागरूक किया। जिला मलेरिया अधिकारी डा. विनय कुमार ने बताया कि डेंगू जानलेवा बीमारी है, लेकिन इसका इलाज संभव है।
उन्होंने कहा कि किसी भी सूरत में बुखार होने पर लापरवाही न बरती जाए। अपने आसपास सफाई का ध्यान रखना चाहिए। इस अवसर गांव में कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव कराया गया। गांव में स्वास्थ्य कैंप लगाकर लोगों के स्वास्थ्य की जांच की गई। कैंप में 24 लोगों के ब्लड सैंपल लिए गए।
ग्राम प्रधान उमेश शर्मा तथा प्रधानाचार्य राजेश वशिष्ठ आदि का सहयोग रहा। स्वास्थ्य विभाग की टीम में जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. विनय, एचएस कृष्णकुमार, दिनेश शर्मा एचएस, अवधेश वाडेकर एलए, सोनू कुमार, वेदप्रकाश आदि मौजूद रहे।