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धोखे से नौकरी पाने वाले पांच शिक्षकों की सेवा समाप्त

Fri, 03 May 2019 11:22 PM IST
NAVEEN GUPTA अमर उजाला ब्यूरो
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डॉक्टर भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी आगरा से बीएड की फर्जी/टैंपर्ड अंक तालिकाओं के आधार पर विभाग को धोखे में बेसिक शिक्षा विभाग में नौकरी पाने के आरोपी पांच शिक्षकों की सेवा बीएसए ने समाप्त कर दी है। इन्हें मिले वेतन भत्ते की रिकवरी करने के अलावा इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश खंड शिक्षा अधिकारियों को दिए गए हैं।
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बेसिक शिक्षा अधिकारी गीता वर्मा के अनुसार उक्त शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की जांच एसआईटी द्वारा काफी समय से चल रही थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव और सहायक शिक्षा निदेशक सहारनपुर मंडल के निर्देश पर ही पांच शिक्षकों की सेवाएं समाप्त की गई हैं। जांच में इनकी संबंधित विश्वविद्यालय की अंक तालिकाएं फर्जी/ टैंपर्ड मिली हैं। इन सभी को अपनी सुनवाई का पर्याप्त मौका दिया गया, लेकिन इसके बाद भी ये इस संबंध में कोई स्वीकार्य तथ्य प्रस्तुत नहीं कर सके। इसी आधार पर संबधित विभागीय अधिकारियों के निर्देेश पर उक्त शिक्षकों की सेवा समाप्ति का निर्णय जिला चयन समिति की बैठक में लिया गया है।

इन पर हुई कार्रवाई
बीएसए के अनुसार ऊन क्षेत्र में तैनात शिक्षिका सीमा 2011 में हुई थी। ये सहारनपुर जिले से शामली में सितंबर 2012 में आई थी। ऊन ब्लॉक क्षेत्र मे ही तैनात शिक्षिका रविता 2010 में तैनात हुई थी। शाहजहांपुर जिले से अगस्त 2012 से शामली जनपद में तैनात हैं। शामली क्षेत्र के शामली ब्लॉक क्षेत्र में तैैनात शिक्षिका रेणू की तैनाती 2010 में हुई थी। ये बाराबंकी जिले से शामली में 2013 में आई थी। कांधला ब्लॉक क्षेत्र में तैनात शिक्षक सुनील कुमार  2010 से सर्विस कर रहे हैं। ये मुरादाबाद जिले से सितंबर 2016 में शामली आए थे। इसके अलावा कांधला ब्लॉक में तैनात शिक्षक ने नौकरी 2010 से शुरू की थी। शाहजहांपुर जिले से ये शामली में 2016 में आए थे।
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सवाल भी उठे
शामली। इस मामले में खुद विभाग की कार्यप्रणाली भी संदेह के घेरे में आ रही है। हैरानी की बात है कि ये शिक्षक आठ से नौ साल से नौकरी कर रहे हैं। नियम है कि इनके तमाम कागजातों की संबंधित विश्वविद्यालय आदि से जांच और सत्यापन के बाद ही इनका वेतन शुरू होता है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर अब से पहले ये सब क्यों पकड़ में नहीं आया। ये भी बेहद अहम जांच का विषय है।
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