थानाभवन। मंडी समिति की हालत खराब है। यहां किसानों और उनके पशुओं के लिए पीने का पानी तक नहीं है। सड़के खराब पड़ी हुई है। यही नहीं आए दिन मंडी शुल्क की चोरी हो रही है, जबकि मंडी प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।
वर्ष 1999 में दिल्ली-सहारनपुर रोड पर मंडी समिति नए भवन में स्थानांतरित हुई थी। उस समय मंडी परिसर में किसानों के लिए कैंटीन के साथ-साथ दुकानों और व्यापारियों के लिए टीन शेड बनाई गयी थी। इन दुकानों को सबसे ज्यादा मंडी शुल्क जमा करने वाले व्यापारियों को आवंटित किया था।
बाद में 20 दुकानें ओर बनाई गयी, जिनको मंडी शुल्क देने वाले को न देकर बोली के आधार पर आवंटित किया गया था। वर्तमान में मंडी में 55 लाइसेंसी और लगभग एक दर्जन बिना लाइसेंसी व्यापारी मंडी में कार्य कर रहे है। मंडी में कुल 34 दुकानें है। मंडी में लाखों रुपये प्रतिदिन का व्यापार होता है। मगर, मंडी की हालत खराब है। मंडी परिसर में छह हैंडपंप है, इनमें दो बेकार है।
बैरियर के लिए बने कमरे पर ताला लगा है, वहां पर कोई गेटमैन नहीं है। इसके अलावा मंडी परिसर में गंदगी के ढेर लगे है। जगह-जगह से मंडी परिसर की बाउंड्री वॉल टूटी हुई है। सड़के भी गड्ढो में तब्दील हो गई है। बुरा हाल तो सब्जी बेचने वाले किसानों का है।
फुटकर सब्जी विक्रेता सोमपाल, जयपाल, किरण, सुमेष चंद आदि ने बताया कि मंडी समिति अधिकारियों की मिली भगत से ये आढ़ती अपने मनमर्जी से
माल निकालते है। इसके अलावा मंडी समिति के बाहर फल, सब्जी और अनाज आदि का व्यापार नहीं होना चाहिए, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही से जलालाबाद में दो तथा थानाभवन में दो केले के गोदाम है। दिल्ली से प्रतिदिन दो ट्रक फलों के आते है, जो मंडी में न आकर सीधे आढ़तियों के पास मंडी परिसर के बाहर चले जाते है। इससे मंडी समिति के शुल्क को चूना लगा रहा है।