शामली। दिल्ली-यमुनोत्री फोरलेन निर्माण विवादों में उलझ गया है। यहां पीपीपी मॉडल भी पूरी तरह फेल हो गया है। हैदराबाद की निर्माण एजेंसी एसवीडब्लू ने निर्माण से हाथ खींच लिया। इसके बाद निर्माण एजेंसी के बैंकों को नया प्रमोटर तलाश करने की जिम्मेदारी दी गई है, नया प्रमोटर मिलने तक दिल्ली- शामली, सहारनपुर मार्ग की मरम्मत होती रहेगी। सड़क की मरम्मत की जिम्मेदारी शासन की होगी।
दिल्ली-यमुनोत्री मार्ग का वर्ष 2009 में उत्तर प्रदेश राज्य राज मार्ग ने पीपीपी मॉडल से फोरलेन का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा था। शासन ने दिल्ली से लेकर सहारनपुर जिले की 207 किमी तक स्वीकृत करते हुए तीन सौ करोड़ रुपये का बजट हैदराबाद की प्राइवेट एजेंसी एसवीडब्लू को निर्माण एजेंसी निर्धारित करते हुए जिम्मेदारी थी। निर्माण एजेंसी ने दिल्ली से लेकर बागपत-शामली, सहारनपुर जिलों में पुलियों निर्माण शुरू किया था।
पेड़ों की कटान की अनुमति न आने पर तीन साल तक निर्माण कार्य अधूरा रहा। मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद पेड़ों की कटान की अनुमति आने के बाद निर्माण एजेंसी ने इस मार्ग पर निर्माण कराने से हाथ खींच लिए थे। एक साल तक दिल्ली-शामली, सहारनपुर मार्ग का निर्माण कार्य शुरू न होने पर उत्तर प्रदेश शासन ने उत्तर प्रदेश राज्य राज मार्ग प्राधिकरण ने 66.70 करोड़ रुपये की लागत से इस मार्ग की मरम्मत करायी थी।
इस साल उत्तर प्रदेश शासन के निर्देश पर उत्तर प्रदेश राज्य राजमार्ग प्राधिकरण की ओर हैदराबाद की निर्माण एजेंसी का टेंडर निरस्त करने का नोटिस दिया गया। उत्तर प्रदेश राज्य राजमार्ग प्राधिकरण ने हैदराबाद की निर्माण एजेंसी एसवीडब्लू के बैंकों को निर्देश दिए कि वह नई सहयोगी निर्माण एजेंसी प्रमोटर के रूप खड़ाकर दिल्ली- शामली, सहारनपुर मार्ग का निर्माण कराया जाए।
बैंको को फिलहाल नया प्रमोटर नही मिल पा रहा है, उधर बागपत के अधिवक्ता पवन तिवारी, अखिलेश चंद शुक्ला की याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शामली, बागपत, गाजियाबाद, सहारनपुर जिलों के डीएम की एक कमेटी गठित करते हुए उत्तर प्रदेश शासन के प्रमुख सचिव को चेयरमैन नियुक्त करते हुए दिल्ली- शामली, सहारनपुर मार्ग की मौजूदा स्थिति की रिपोर्ट मांगी है। हाईकोर्ट के आदेश पर डीएम शामली ओपी वर्मा ने दिल्ली- शामली, सहारनपुर मार्ग का निरीक्षण करके रिपोर्ट शासन के माध्यम से भिजवा दी है।