मुजफ्फरनगर। चीन की सीमा पर भारतीय सैनिकों के शहीद होने से लोगों में गम और गुस्सा है। चीन का विरोध करते हुए व्यापारी चीन निर्मित सामान का बहिष्कार करने का एलान कर रहे हैं। चीन का सामान मंगाना भी बंद कर दिया है। जिले के व्यापारी कहते हैं कि वे सीधे तौर पर चीन से माल नहीं मंगाते। अधिकांश सप्लाई दिल्ली से आती है। उनकी कोशिश होती है कि मेड इन इंडिया सामान ही लेकर आएं। खरीदार भी चीन का सामान खरीदने से बचते हैं।
जनपद में आयरन, पेपर और केमिकल इंडस्ट्रीज प्रमुख हैं। इसके अलावा दवा और गारमेंट्स का भी बड़ा कारोबार है। प्रमुख उद्यमी पंकज अग्रवाल बताते हैं कि अब फैक्टरियों में संचालित मशीनों के पार्ट्स का चीन से आयात काफी कम हो गया है लेकिन दवा का ज्यादातर साल्ट चीन से आता है। भारत के अधिकांश दवा निर्माता इसी साल्ट का इस्तेमाल करके प्रोडक्शन करते हैं। जूते-चप्पल, बेड शीट, जींस, टीशर्ट, जैकेट, हल्के इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम चीन से आते हैं। वह बताते हैं कि बाजार से चीन के वर्चस्व को कम करने के लिए भारत में सस्ते एवं अच्छे सामान का उत्पादन शुरू करना होगा।
- बोले व्यापारी...
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व्यापारी चीन निर्मित कपड़ा लाने से बचते हैं। बाजार में इसकी डिमांड नहीं है। जींस एवं जैकेट आदि चीन निर्मित आती हैं, जिनकी हम पहले से ही बिक्री नहीं करते हैं और आगे भी बेचेेंगे। - आकाश, कपड़ा व्यापारी।
- जिले के व्यापारी सीधे तौर पर चीन से सामान नहीं मंगाते हैं। ज्यादातर कपड़ा सूरत से आता है। मुजफ्फरनगर के कपड़ा व्यापारी दिल्ली से सामान लाते हैं। चीन निर्मित सामान की बिक्री से सभी परहेज करते हैं। - राजकुमार संगल, कपड़ा व्यापारी।
- घड़ी एवं अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स सामान के काफी पार्ट्स चीन से आते हैं। सस्ती घड़ियां चीन निर्मित होती हैं। घड़ियों के सैल जापान से आते हैं। ज्यादातर लोग ब्रांडेड घड़ियां ही पसंद करते हैं। - गौरव कुमार, घड़ी विक्रेता।
- व्यापारी चीन निर्मित सामान का पूरी तरह बहिष्कार करेंगे। सभी व्यापारी इस पर एकमत हैं। जनता में भी आक्रोश है। न तो व्यापारी चीन निर्मित सामान लाएंगे और न ही लोग खरीदेंगे। - कृष्ण गोपाल मित्तल, व्यापारी नेता।