पहाड़ो पर बारिश रुकने का नाम नहीं ले रही है। जिसके चलते दूसरे दिन यमुना में 43 हजार क्यूसेक पानी और छोड़ दिया गया। शनिवार को हथिनीकुंड ताजेवाला बांध से छोड़े गए 35 हजार क्यूसेक पानी का असर शाम के समय जिले में होने लगा है। बाढ़ की आशंका के चलते यमुना किनारे वाले गांवों के लोग जागकर रात काट रहे हैं।
पिछले दो दिनों से पहाड़ों पर हो रही बारिश का असर यमुना में दिखाई दे रहा है। रविवार दोपहर दो बजे तक यमुना का जलस्तर 17 हजार क्यूसेक पर स्थिर रहा। दोपहर दो बजे के बाद यमुना फिर उफनी। शाम चार बजे के लगभग यमुना में हथिनीकुंड बैराज से 43 हजार क्यूसेक पानी छोड़ दिया गया। जिससे हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग के अधिकारियों में हड़कंप मच गया। इस पानी का असर सहारनपुर, शामली, बागपत में दिखने लगा है।
कैराना यमुना नदी पर तैनात केंद्रीय जल आयोग के अधिकारियों ने बताया कि शनिवार को यमुना का अधिकतम जलस्तर 227.93 मीटर रिकॉर्ड किया गया था। रविवार दोपहर से जलस्तर में इजाफा हुआ है। धीरे धीरे बढे़ जलस्तर से अभी तटबंधों को नुकसान नहीं पहुंचा है। हथिनीकुंड ताजे वाला बैराज पर सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता शिवराज सिंह ने बताया कि इससे पूर्व वर्ष 2010 में यमुना में सात लाख क्यूसेक पानी गुजर चुका है। एक लाख क्यूसेक पानी के बाद बाढ़ की संभावना बढ़ जाती है। उधर, एडीएम भरत पांडे ने बताया कि कैराना यमुना नदी 227 मीटर जलस्तर पर बह रही है। यमुना किनारे के गांवों में पहले से अलर्ट है। ग्राम समितियां- बाढ़ चौकियों से प्रतिदिन रिपोर्ट तलब की जा रही है।