शामली में सियासी मुद्दा बने पलायन प्रकरण में समाजवादी पार्टी ने संतों से जांच करा एक तीर से दो निशाने साधे। एक तरफ भाजपा के हाथ बांध दिए, तो क्षेत्रीय सपा नेताओं के नाम भी शामिल होने से पक्षपात के आरोपों से भी खुद का दामन बचाने का काम कर लिया।
सपा सरकार के केबिनेट मंत्री शिवपाल यादव के कहने पर आचार्य प्रमोद कृष्णन, स्वामी चक्रपाणि, चिन्मयानंद स्वामी, देवेंद्रानंद महाराज और महाराज कल्याण देव का दल पलायन प्रकरण का सच जानने के लिए कैराना भेजा था।
बृहस्पतिवार को संतों के जांच दल ने अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को सौंपी, जिसमें उन्होंने माना कि कैराना में गुंडागर्दी का माहौल है तथा खराब कानून व्यवस्था यहां की सबसे बड़ी समस्या है। वहीं, कहा गया कि पलायन के नाम पर दंगा कराने की साजिश हो रही है तथा दंगा तीन से चार महीने में कराया जा सकता है।
कैराना क्षेत्र में खराब कानून व्यवस्था के लिए गुंडों को राजनीतिक संरक्षण मिलना बताया गया। खास बात यह है कि उसके लिए भाजपा सांसद हुकुम सिंह के साथ ही सपा के कैराना विधायक नाहिद हसन तथा सपा एमएलसी वीरेंद्र सिंह को भी दोषी माना। इससे स्पष्ट हो गया है कि संतों ने ऐसी जांच रिपोर्ट बनाई, जिससे पलायन का मुद्दा उठाने वाली भाजपा को भी घेरा जा सके और सपा नेताओं के नाम शामिल करके विपक्ष को पलटवार करने का मौका भी न मिल सके।