ऊन। क्षेत्र की प्यास बुझाने और किसानों की खेती को संजीवनी देने वाली काठा नदी आज खुद पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रही है। हालत यह है कि पिछले करीब 50 वर्षों से सूखी पड़ी काठा नदी केवल कागजों और योजनाओं में ही बह रही है।
हर वर्ष नदी की सफाई और खोदाई के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं, लेकिन नदी में पानी नहीं पहुंच पाया है। इससे किसानों में भारी रोष है। ग्रामीणों और किसानों का कहना है कि काठा नदी में पानी छोड़े जाने की मांग को लेकर कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई गई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिले। नतीजा यह है कि क्षेत्र का भूजल स्तर लगातार नीचे गिरता जा रहा है और किसान सिंचाई संकट से जूझ रहे हैं।
श्यामली शामला के पूर्व प्रधान उग्रसिंह बताते हैं कि पहले काठा एक बरसाती नदी थी, लेकिन बाद में गर्मियों में गंदेवड़ा, बीरखेड़ी और तीतरों नाले से इसमें पानी छोड़ा जाता था। यह पानी मुंडेट, काठा, मामौर और कैराना होते हुए यमुना नदी में जाकर मिलता था। नदी की लंबाई करीब 35 से 40 किलोमीटर है।
वर्ष 1977 में काठा को नहर का दर्जा दिया गया था। बाढ़ नियंत्रण बोर्ड की चेयरमैन रहीं अनुराधा चौधरी के प्रयासों से करीब 302 करोड़ रुपये की लागत से रुड़की से गंदेवड़ा तक गंगा का पानी पहुंचाया गया था। लेकिन गंदेवड़ा से बीरखेड़ी के बीच करीब डेढ़ किलोमीटर की दूरी के कारण पानी काठा नदी तक नहीं पहुंच पाया और नदी सूखी की सूखी रह गई।
मंत्री हुकुम सिंह की योजना भी अधूरी रह गई
पूर्व सांसद और पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वर्गीय हुकुम सिंह ने काठा नदी को किसानों की सिंचाई के लिए नहर के रूप में विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना तैयार कराई थी। इसके तहत सहारनपुर और शामली के अधिकारियों तथा सिंचाई एवं ड्रेनेज विभाग के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से योजना बनाकर शासन से स्वीकृति दिलाई। नदी में कई स्थानों पर डैम भी बनाए गए, ताकि जलस्तर बढ़ सके और किसानों को सिंचाई का लाभ मिल सके।
लेकिन हुकुम सिंह के निधन के बाद यह योजना भी अधर में लटक गई और धीरे-धीरे पूरी तरह ठंडे बस्ते में चली गई। इसके बाद किसानों ने कई बार नदी में पानी छोड़े जाने की मांग उठाई, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी।
सैकड़ों गांवों को मिलेगा लाभ
ग्रामीणों का कहना है कि यदि काठा नदी में दोबारा पानी छोड़ा जाए तो बझेड़ी, रंगाना, हरसाना, बसी चुंदयारी, श्यामली शामला, मुंडेट खादर, ढिंढाली, भोगीमाजरा समेत सैकड़ों गांवों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। इससे न केवल खेतों की सिंचाई बेहतर होगी बल्कि क्षेत्र का गिरता भूजल स्तर भी सुधरेगा।
किसानों ने बयां किया दर्द
पूर्व प्रधान उग्रसिंह का कहना है कि काठा नदी में पानी आने से भूजल स्तर बढ़ेगा और किसानों को सिंचाई में राहत मिलेगी। नदी के दोनों ओर बनी सड़कों से ग्रामीणों के आवागमन में भी सुविधा होगी।
ऊन निवासी जगमेर शर्मा ने कहा कि नदी में पानी आने से किसानों की निजी नलकूपों पर निर्भरता कम होगी और खेती की लागत घटेगी।
हरसाना निवासी बबलू ने बताया कि अभी किसानों को निजी नलकूपों से सिंचाई करनी पड़ती है, जिसमें भारी खर्च आता है। नदी में पानी आने से मुफ्त सिंचाई की सुविधा मिल सकेगी।
बझेड़ी निवासी देवराज चौधरी का कहना है कि समय पर पर्याप्त पानी मिलने से फसल उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
काठा नदी में पानी नहीं आने का मामला जानकारी में नहीं है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों से वार्ता कर पानी का प्रयास किया जाएगा। किसानों को परेशानी नहीं होने दी जाएगी। - आलोक यादव, जिलाधिकारी