एमएसपी पर बिके फसल, किसानों की मेहनत होगी सफल
शामली: कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन कर रहे किसान एमएसपी पर कानून बनाने की मांग कर रहे हैं। किसानों की मांग है कि एमएसपी को अनिवार्य किया जाए, तभी किसानों को लाभ मिलेगा। हालात यह हैं कि कुल फसलों के उत्पादन का बहुत कम हिस्सा ही एमएसपी पर बिक पाता है। जिले में धान के कुल उत्पादन का एक प्रतिशत हिस्सा भी सरकारी केंद्रों पर नहीं खरीदा जा सका, जबकि गेहूं के भी हालात ऐसे ही हैं। गन्ने का भी लगभग 60-65 प्रतिशत उत्पादन ही शुगर मिलों में जा पाता है।
जनपद में 2019-20 में धान खरीद के दो हजार क्विंटल के लक्ष्य के सापेक्ष 2013 क्विंटल की खरीद हुई थी। इस बार तीन हजार क्विंटल के लक्ष्य के सापेक्ष अभी तक नौ हजार 917 क्विंटल की खरीद हो चुकी है। पिछले वर्ष जिले में लगभग छह लाख क्विंटल धान का उत्पादन हुआ था। इससे तुलना करें तो कुल उत्पादन का 0.33 प्रतिशत धान ही सरकारी खरीद में गया। किसान अपने खाने के लिए लगभग 50 प्रतिशत उत्पादन रखते हैं, बाकी औने-पौने दामों में खुले बाजार में ही बिका। इस बार भी धान की बड़ी बेकद्री हुई है। मोटा धान तो सरकारी रेट पर बिका, लेकिन बासमती के दाम बेहद कम मिले। इसी तरह यदि गेहूं खरीद पर नजर डालें तो पिछले साल एक लाख 78 हजार क्विंटल गेहूं की सरकारी खरीद हुई, जबकि उत्पादन 22 लाख 80 हजार 140 क्विंटल हुआ था। इस तरह लगभग सात प्रतिशत खरीद ही सरकारी केंद्रों पर हो सकी। 50 प्रतिशत उत्पादन किसानों ने अपने प्रयोग के लिए रखा हो तो भी 43 प्रतिशत उत्पादन किसानों को सस्ते दामों में खुले बाजार में बेचना पड़ा।
एमएसपी पर गन्ने की सबसे ज्यादा खरीद होती है, लेकिन इसका भी पूरा उत्पादन शुगर मिलों में नहीं जा पाता। पिछले गन्ना सीजन में जिले में गन्ने का लगभग 692 लाख क्विंटल का उत्पादन हुआ। इसमें से जिले की शुगर मिलों ने 378 लाख के लगभग ही पेराई की, जो लगभग 54 प्रतिशत होता है। बाकी 44 प्रतिशत में से लगभग 30 प्रतिशत गन्ना किसानों को कोल्हुओं और क्रशरों पर बेचना पड़ा। शेष गन्ना बीज या जिले की दूसरी शुगर मिलों को गया है।
एमएसपी अनिवार्य करने से मिलेगा लाभ
शामली। भाकियू के प्रदेश प्रवक्ता कुलदीप पंवार का कहना है कि कृषि कानूनों को खत्म किया जाना चाहिए। किसानों को उनकी फसल एमएसपी पर बेचने का अधिकार दिया जाए। यदि इससे एमएसपी से कम पर कोई फसल खरीदता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सवित मलिक का कहना है कि कृषि कानून यदि किसानों के हित में थे तो उनके लिए अध्यादेश क्यों लाया गया। उनका कहना है कि एमएसपी पर खरीद का कानून बनना चाहिए। किसानों का बहुत कम उत्पादन एमएसपी पर बिकता है।