शामली। जिले में अवैध खनन को लेकर खाकी और खनन माफियाओं में कई बार संग्राम छिड़ चुका है। कई बार पुलिस-प्रशासन पर हमला किया गया। इस दौरान खनन करने वालों को जेल भी भेजा गया, लेकिन फिर भी आज भी खनन माफियाओं की बादशाहत खाकी पर हावी है।
शामली की तहसील कैराना और ऊन क्षेत्र से यमुना नदी बहती है। यमुना नदी में बड़े स्तर पर खनन किया जाता है। खासकर कैराना के तहसील के मवी, काकौर, नगला राई, खुरगान, बसेडा, पठेड़ आदि तथा ऊन तहसील के नाई नगला, बिडौली, चौसाना आदि गांवों में खनन किया जाता है। पूर्व में स्थानीय पुलिस-प्रशासन की सेटिंग से चले खनन की शिकायत पर अब सीबीआई इसकी जांच कर रही है। जिसके बाद फिलहाल खनन पर प्रशासन नकेल कस रहा है।
गंदराऊ में मंगलवार को खनन माफियाओं को पकड़े गई पुलिस पर हमला किया गया, जिसमें सब इंस्पेक्टर समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस पर यह हमला पहला नहीं है। इससे पूर्व में खनन माफिया पुलिस पर हमला करते र्है।
कैराना के इसी गांव गंदराऊ ने लोगों ने कई साल पूर्व पुलिस-प्रशासन की टीम पर हमला कर दिया था, जिसमें माफियाओं ने एसडीएम की गाड़ी भी तोड़ दी थी। इस मामले में मुकदमा दर्ज कराया गया है। उधर तीन साल पूर्व थाना झिंझाना पुलिस खनन पकड़ने गई थी, जिसमें तत्कालीन नायब तहसीलदार तथा एसओ झिंझाना बीपी यादव पर जानलेवा हमला कर दिया था।
इस हमले में हमलावरों ने एसओ को अधमरा कर दिया था, लेकिन आज तक इस मामले में कोई प्रभार कार्रवाई नहीं कर पाई है, यदि प्रभावी कार्रवाई की जाती है जाहिर है कि पुलिस पर इस तरह का हमला दोबारा नहीं होता।