शामली। आतंकियों को भगाने वाले पलविंदर की धरपकड़ के बाद फिर से कैराना सुर्खियों में आ गया है। पाकिस्तान से नकली करेंसी, अवैध हथियार और मादक पदार्थों की तस्करी का रास्ता कैराना को बनाया हुआ था। कैराना का इकबाल काना, दिलशाद मिर्जा और हामिदा उर्फ फैमीदा इस नेटवर्क को चलाते रहे हैं।
अक्तूबर में ही कैराना के नामित सभासद फरहत खान को दिल्ली पुलिस ने आईसआई के लिए जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया था। वह मामला अभी ठंडा नहीं पड़ा कि अब परमिंदर की गिरफ्तारी सामने आ गई। इससे पूर्व कांधला क्षेत्र के गंगेरू का रहने वाला इसराइल पाकिस्तान से लौटते समय अटारी बॉर्डर पर स्टील के कंटेनर में पांच पिस्टल और मैगजीन के साथ दबोचा गया था। वहीं, कैराना में अपनी मां के साथ आया पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के जिला जंग सदर का रहने वाला नवेद 2015 में लापता हो गया था। उसका आज तक कोई सुराग नहीं लग सका है।
इसके अलावा थानाभवन के मदीना कालोनी में काफी समय तक रहा बांग्लादेशी यासीन 23 जून 2015 को परिवार सहित फरार हो गया था। यासीन ने यहां रहते हुए अपना राशन कार्ड बनवा लिया था। तभी खुलासा हुआ था कि यासीन बांग्लादेशी है। उसके बारे में भी पुलिस और खुफिया इकाइयों कोई जानकारी नहीं जुटा सकीं। यही नहीं शामली के अपनाघर आश्रम में कई महीने से रहने वाला मायनूस भी खुद को बांग्लादेशी बता रहा था। वह 18 नवंबर को संदिग्ध परिस्थिति में लापता हो गया था।
जिले का आतंकी कनेक्शन
- वर्ष 2005 में एसटीएफ ने शामली से पांच किलो आरडीएक्स और अत्याधुनिक असलहों के साथ जम्मू कश्मीर के रहने वाले तीन युवकों को गिरफ्तार किया था।
- कैराना निवासी इकबाल काना और दिलशाद मिर्जा पाकिस्तान में रहकर नकली नोटों का नेटवर्क संचालित कर रहे हैं।
- गठरी उद्योग के जरिये समझौता एक्सप्रेस से कैराना लाई गई 40 पिस्टल बरामद हुई थीं।