शामली। मुजफ्फरनगर - शामली मार्ग पर परखच्चे उड़ी वैन को देखकर ही दुर्घटना की भयावता का अंदाजा लगाया जा सकता है। दुर्घटना में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत से हर किसी को गम था, राहगीरों के साथ-साथ आसपास के गांवों के लोग भी घटनास्थल हादसे की सूचना मिलते ही पहुंचे। हर कोई पीड़ित परिवार को सांत्वना दे रहा था।
शुक्रवार की सुबह करीब नौ बजे मुजफ्फरनगर- शामली मार्ग पर हुए हादसे को देखकर राहगीरों की भी चीख निकल पड़ी। वैन की हालत और उसमें चिपके पड़े शवों को देखकर हर कोई दुर्घटना का अंदाजा लगा रहा था। जिसे भी इस दर्दनाक हादसे की सूचना मिली, तो वह उस ओर दौड़ पड़ा।आसपास के गांवों के लोग घटनास्थल पर पहुंचे।
घटनास्थल पर पड़ी तीन लोगों की लाश को देखने को देखकर ही लोगों ने दुर्घटना का अंदाजा लगाया। इस दौरान बसों व अन्य वाहनों से आ रहे राहगीर भी रास्ते में रुक गए और घटना के बारे में जानकारी ली। हादसे को देखकर हर कोई बस यही कह रहा था कि इनका तो परिवार ही बर्बाद हो गया। उधर, परिजनों की रो-रोकर बुरी हालत हो गई थी। हर कोई उन्हें सांत्वना दे रहा था।
रोजाना वैन से मजदूरी के लिए जाते थे बनत
पिछले करीब डेढ़ साल से मुजम्मिल व उस्मान का पूरा परिवार बनत में नगर पंचायत द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्य में मजदूरी कर रहे थे। रोजाना मजदूरी करने वाले परिवार के सभी लोग अपनी वैन से आते और शाम को उसी से गांव लौटते थे।
शुक्रवार को भी वैन में परिवार के ही नौ लोग मजदूरी के लिए बनत गए, जहां अन्य मजदूर न आने व जुमे की नमाज पढ़ने के कारण उन्होंने भी छुट्टी करने का फैसला कर दिया। इसके बाद सभी लोग वापस लौट रहे थे, जहां रास्ते में उनके साथ दुर्घटना हो गई। घटनास्थल पर पहुंचे मसरूफ के पिता अब्बास का रो-रोकर बुरा हाल था। वह कह रहा था कि अभी डेढ़ साल पहले ही इसकी शादी हुई है। अब मैं बहू को क्या जवाब दूंगा।