शामली। एआरटीओ कार्यालय में फर्जीवाडे़ किसी से छिपे नहीं है। अब ताजा मामला लोन की गाड़ी बिकवाने का है। एआरटीओ कर्मचारी ने लोन की गाड़ी को फर्जी कागजात तैयार कर बिकवा दिया। मामला सामने आया, तो फाइनेंस कंपनी की ओर से एआरटीओ कर्मचारी समेत गाड़ी खरीदने वाले और बेचने वाले के खिलाफ कोर्ट के माध्यम से रिपोर्ट दर्ज कराई है।
दरअसल, कोतवाली क्षेत्र के गांव लिलौन निवासी फरमान ने हिंदूजा लीलैंड फाइनेंस कंपनी से गत 11 जून 2012 को लोन पर स्कॉर्पियो निकलवाई थी। फरमान ने गाड़ी के फर्जी कागजात तैयार कराकर बगैर लोन चूकता किए बेच दी। मामला कंपनी के संज्ञान में आया, तो उन्होंने पड़ताल की। जिस पर कंपनी के मेरठ कार्यालय के मैनेजर धर्मवीर सिंह ने कोतवाली में मामले की तहरीर दी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। बाद में मैनेजर धर्मवीर सिंह ने सीजेएम कोर्ट मुजफ्फरनगर के माध्यम से शहर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई।
कोतवाली में दर्ज रिपोर्ट के अनुसार फरमान ने एआरटीओ कार्यालय शामली के कर्मचारी से सांठ गांठ कर नो ड्यूज आदि के फर्जी कागजात तैयार कराए और गाड़ी को शामली निवासी ममता पत्नी सुनील को बेच दिया। आरोप है कि एआरटीओ के संबंधित कर्मचारी और अधिकारियों ने भी बगैर जांच और विक्रेता से सांठगांठ कर फर्जी दस्तावेज तैयार कर फाइनेंस कंपनी को करीब साढ़े सात लाख रुपये का नुकसान पहुंचाया। कोतवाली प्रभारी डीपी सिंह ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर तीन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है।