बाइक चोरी करने वाले अंतरजनपदीय गिरोह के दो बदमाश दबोचे
अमर उजाला ब्यूरो
शामली। थानाभवन थाना पुलिस ने बाइक चोरी करने वाले अंतरजनपदीय गिरोह के दो बदमाशों को गिरफ्तार किया है, जबकि गिरोह के दो बदमाश पुलिस को देखकर फरार हो गए। बदमाशों के कब्जे से चोरी की आठ बाइक, दो तमंचे और कारतूस बरामद हुए।
पुलिस लाइन सभागार में प्रेसवार्ता कर एसपी अजय कुमार ने बताया कि शनिवार सुबह करीब साढ़े 10 बजे थानाभवन थाना प्रभारी संदीप बालियान, उपनिरीक्षक धर्मेंद्र यादव, रविंद्र सैनी, पवन सैनी, भूपेंद्र सिंह पुलिस टीम के साथ वांछित की तलाश कर रहे थे। उसी समय मुखबिर से चरथावल की तरफ से चोरी की बाइक पर अवैैध शस्त्र लेकर दो बदमाशों के आने की सूचना मिली। पुलिस टीम ने मसावी रोड पर जाकर घेराबंदी शुरू कर दी। इसी दौरान मुजफ्फरनगर की तरफ से आ रही बाइक को रोकने का इशारा किया। बाइक सवार पुलिस को देख भागने लगे। पुलिस टीम ने दोनों लोगों को दबोच लिया और उनकी तलाशी ली। उनके पास से एक-एक तमंचा और कारतूस बरामद हुए। एसपी के मुताबिक पकड़े गए आरोपियों ने अपने नाम इमदाद और इमरान निवासीगण मोहल्ला छत्ता कस्बा व थाना ननौता जनपद सहारनपुर बताया। बरामद बाइक के कागज मांगे तो आरोपियों ने कागज न होना बताते हुए कहा कि उन्होंने यह बाइक हसनपुर लुहारी के जंगल से चोरी की थी।
इसके बाद आरोपियों से सख्ती से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि चोरी की सात बाइक जलालाबाद में दुलावा रोड कब्रिस्तान के पास ट्यूबवेल पर जंगल ग्राम जलालाबाद में खड़ी कर रखी है, जिनकी निगरानी वहां दो लोग कर रहे हैं। जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची तो दोनों बदमाश फरार हो गए। पकड़े गए आरोपियों ने फरार साथियों के नाम नौशाद और सुल्तान निवासी मोहल्ला छत्ता कस्बा व थाना ननौता बताया। पकड़े गए बदमाशों की निशानदेही पर मौके से सात बाइक और बरामद हुई। एसपी ने बताया पकड़े गए बदमाशों का बाइक चोरी करने वाला अंतरजनपदीय गिरोह है। इस गिरोह ने शामली के अलावा मुजफ्फरनगर, देवबंद, सहारनपुर, जलालाबाद आदि स्थानों से बाइक चोरी करते थे। फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है।
शौक पूरा करने को करते थे बाइक चोरी
शामली। एसपी अजय कुमार ने बताया कि पकड़ा गया इमदाद पांचवीं पास है जबकि इमरान ने इंटर कर रखी है। पूछताछ में दोनों ने बताया कि अच्छे कपड़े पहनने और अन्य शौक पूरा करने के लिए वे पिछले कुछ समय से बाइक चोरी करने का धंधा कर थे। वे चोरी की बाइक को पांच हजार रुपये तक में बेच देते थे।