ग्राम समाज की भूमि को कब्जा मुक्त कराते पुलिस कर्मी।
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शामली के झिंझाना मे न्यायालय के आदेश पर शुक्रवार को पुलिस प्रशासन की टीम ने झिंझाना क्षेत्र के गांव शीतलगढ़ी में करीब 100 बीघा जमीन से अवैध कब्जा हटवाकर पीड़ित पक्ष को कब्जा दिला दिया। अभी 196 बीघा जमीन पर अवैध कब्जा बाकी है, जिसे शनिवार को कब्जा मुक्त कराया जाएगा।
गांव शीतलगढ़ी निवासी मुखराम के पुत्र तेलूराम और वारिसान चूहड़ सिंह पुत्र नकली, धर्मा, रमेश इंद्र, सुल्तान और धर्मबीर आदि ने अपनी पुश्तैनी 296 बीघा जमीन को कब्जा मुक्त कराने की मांग की थी। साथ ही न्यायालय में वाद भी दायर किया था। उसमें कहा था कि वर्ष 1978 में यमुना नदी में पानी आने पर तत्कालीन ग्राम प्रधान धर्मपाल ने उक्त जमीन को ग्राम समाज में दर्ज कराकर अपने परिजनों और रिश्तेदारों के नाम पट्टे काट दिए थे। उधर, एक सप्ताह पूर्व ही इस मामले में न्यायालय ने मुखराम पक्ष में फैसला सुनाया।
इसी के चलते शुक्रवार को न्यायालय के आदेश पर तहसीलदार ऊन, सीओ कैराना, झिंझाना, कैराना, बाबरी, आदर्श मंडी और गढ़ीपुख्ता थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर 296 बीघा जमीन के अवैध कब्जे से 100 बीघा जमीन को मुक्त करा दिया। खेतों में खड़ी गन्ना और गेहूं की फसल ट्रैक्टर चलवाकर नष्ट कराने के बाद जमीन पर मुखराम पक्ष को कब्जा दिला दिया। उधर, सीओ कैराना राजेश कुमार तिवारी ने बताया की मुखराम के परिजनों ने मुजफ्फरनगर न्यायालय में वाद दायर किया हुआ था। जिसमें उनके पक्ष में निर्णय आने पर 296 बीघा जमीन में से 100 बीघा जमीन को कब्जा मुक्त करा दिया है। बाकि जमीन शनिवार को मुक्त कराई जाएगी। इस दौरान ग्राम प्रधान आजाद सिंह भी मौजूद रहे है। प्रधान का कहना है कि ग्राम सभा की करीब 1100 बीघा जमीन पर अवैध कब्जा है, जिसे मुक्त कराने के लिए प्रक्रिया चल रही है।
कोर्ट में जाने की बात कर रहा दूसरा पक्ष
दूसरे पक्ष से सोमा, मैनपाल, चंद्रलाल, सुमेश, लीला, मांगा और पूना आदि ने बताया कि उक्त जमीन के उनके नाम 1978 में पट्टे आवंटित हुए थे। तब से वह लोग उक्त जमीन पर खेती करते आए हैं और काबिज हैं। उन्होंने कोर्ट से स्थगन आदेश भी लिया हुआ था। बावजूद इसके पुलिस प्रशासन ने दबंगई दिखाते हुए उनके खेतों में खड़ी गन्ना और गेहूं की फसल को नष्ट कर दिया। वह पुुलिस प्रशासन के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।