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देश के नागरिक चीन निर्मित सामान का बहिष्कार करें

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शामली। भारत-चीन सीमा पर बढ़े तनाव को लेकर पूर्व सैनिकों में चीन के खिलाफ आक्रोश व्याप्त है। पूर्व सैनिकों का कहना है कि चीन की कायराना हरकत का मुंह तोड़ जवाब देना चाहिए। वैसे तो भारत शांति प्रिय देश है और सीमा पर शांति चाहता है, लेकिन अगर कोई इसका नाजायज फायदा उठाकर देश को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा तो उसे सबक सिखाना भी जानता है। पूर्व सैनिकों ने कहा कि सरकार अपने स्तर से चीन को जवाब दे रही है, साथ ही देश के लोगों को भी चीन निर्मित सामानों का इस्तेमाल बंद कर उसके खिलाफ परोक्ष रूप से लड़ाई लड़कर उसे आर्थिक रूप से कमजोर बनाना होगा।
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दगाबाज चीन को सबक सिखाना जरूरी
चीन दगाबाज देश है। वह हमेशा धोखेबाजी करता है। कहने और करने में बड़ा अंतर रहता है। 1962 के युद्ध में भी उसने ऐसा ही किया था। इस बार फिर भारतीय सैनिकों पर धोखे से हमला किया। ऐसे धोखेबाज देश को उसके किए की सजा मिलनी ही चाहिए। भारत के नागरिक अपनी सेना के साथ खड़े हैं। लोगों को भी चीन के सामान का बहिष्कार कर उसे सबक सिखाएं। - बिजेंद्र सिंह, हवलदार, गांव रजाक नगर।
चीन निर्मित सामान का इस्तेमाल न करें
चीन में निर्मित उत्पादों का भारत बड़ा बाजार है। चीन के आइटमों का यहां ज्यादा इस्तेमाल होता है। अगर हम सब देशवासी इनका बहिष्कार कर उनका इस्तेमाल बंद कर देंगे, तो चीन आर्थिक रूप से कमजोर हो जाएगा और स्वदेशी वस्तुओं का इस्तेमाल करने से भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। इसलिए सभी देशवासी चीन के सामानों का इस्तेमाल न कर चीन को सबक सिखाएं। - जय मुकर सैनी, गांव हरड़ फतेहपुर।
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चीन को मुंह तोड़ जवाब दिया जाए
भारत की गिनती शांति चाहने वाले देशों में होती है। वह सीमा पर शांति चाहता है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि कोई उसे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करें और वह चुप रहेगा। ऐसा कतई नहीं होगा। अगर कोई देश की तरफ आंख उठाकर देखेगा तो उसे मुंह तोड़ जवाब देना भी जानता है। भारतीय सेना का मनोबल बहुत ऊंचा है और वह हर परिस्थिति में जवाब देने के लिए तैयार है। सरकार को चाहिए कि चीन की कायराना हरकत का मुंह तोड़ जवाब दे और उसे ऐसा सबक सिखाएं कि वह दोबारा कोई भी गलत हरकत करने की सोच ही न सके। - नाहर सिंह, दयानंदनगर शामली।
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