शामली। क्रांतिकारी संत जैन मुनि 108 तरुण सागर महाराज ने कहा है कि प्रत्येक व्यक्ति को हिंसा का विरोध करना चाहिए। अत्याचार को सहन करने की बजाए उसके विरुद्ध और आत्मरक्षा के लिए हथियार उठाना गलत नहीं है। उन्होंने राजनीतिक दलों द्वारा जैन समाज की उपेक्षा पर नाराजगी व्यक्त करते हुए जाति धर्म की बजाए काबिल व्यक्ति को टिकट देने की वकालत की।
सोमवार को रेलवे रोड स्थित जैन धर्मशाला में प्रवास के तीसरे दिन पत्रकारों से बातचीत में जैन मुनि ने कहा कि भगवान महावीर की पहचान अहिंसा से है और विश्व का भविष्य अहिंसा है। दुनिया में अमन चैन लाने के लिए अहिंसक शक्तियों को आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि जल, ध्वनि और वायु प्रदूषण से भी खतरनाक है मन का प्रदूषण।
देश में एक और महाभारत की जरूरत है। पहला महाभारत तख्तो ताज के लिए हुआ था, अब अहिंसा के लिए होगा। इसमें संत मुनियों को कृष्ण की भूमिका अदा करनी होगी। देश से मांस का निर्यात बंद हो, हमारी परंपरा करुणा के निर्यात की है, क्रूरता के निर्यात की नहीं। भारत से यदि घी, दूध का निर्यात नहीं कर सकते तो भ्रष्ट नेताओं का ही निर्यात कर दें, इससे कम से कम भ्रष्टाचार तो खत्म होगा। उन्होंने कहा कि हिंसा से हिंसा बढ़ती है, मगर हिंसा के विरुद्ध हथियार उठाना अपराध नहीं।
नोटबंदी के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसले का स्वागत करते हुए जैन संत ने कहा कि कालाधन भारत ही नहीं पूरी दुनिया के लिए घातक है। यह हर प्रधानमंत्री के बसकी बात नहीं थी। दुनिया के अन्य देशों को भी इसका अनुसरण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में आर्थिक असमानता और गैर बराबरी को खत्म करने के लिए अमीरों से पैसा निकालकर गरीबों तक पहुंचाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि जातिवाद की राजनीति का बोलबाला दुर्भाग्यपूर्ण है। उत्तर प्रदेश में तो केवल जाति के आधार पर वोट दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि सपा, बसपा और कांग्रेस ने राज्य में एक भी जैन को टिकट नहीं दिया, यह देश के लिए घातक है। जैन संत राजनीति से अलग रहते हैं लेकिन काबिल व्यक्ति को प्रत्याशी बनाया जाना चाहिए।
इस मौके पर मोहित जैन, राहुल जैन, प्रवीण जैन, पंकज जैन आदि मौजूद रहे। उधर, सोमवार शाम जैन धर्मशाला में आनंद यात्रा का आयोजन हुआ, जिसमें जैन मुनि तरुण सागर महाराज ने महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। आनंद यात्रा के दौरान जैन समाज के सैकड़ों लोग मौजूद रहे।