शामली। शामली से करनाल जाने के लिए दोनों प्रांतों के यात्रियों को सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। भाजपा की परिवर्तन यात्रा में शामिल हरियाणा के मुख्यमंत्री से भाजपा नेताओं ने इस संबंध में बात की है।
मेरठ से करनाल जिला मुख्यालय को जोड़ने के लिए 1980 के दशक में यमुना नदी पर बिड़ौली में दोनों प्रांतों के सहयोग से सेतु की आधार शिला रखी गई थी। 1990 के दशक में पुल का निर्माण हो जाने के बाद करनाल से शामली के लिए यूपी और हरियाणा रोडवेज के बीच परमिट पर आम सहमति नहीं हो पाई है। भाकियू नेताओं ने करनाल से शामली के बीच बसों का संचालन कराया था, लेकिन इन पर उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम ने इन पर प्रतिबंध लगा दिया था।
मुजफ्फरनगर डिपो के पास करनाल तक रोडवेज बसों के संचालन के तीन परमिट हैं। मुजफ्फरनगर डिपो ने शामली-बिड़ौली पुल से होकर करनाल के लिए रोडवेज बसों का संचालन किया तो हरियाणा के करनाल डिपो ने बसों पर प्रतिबंध लगाते हुए यह तर्क दिया था कि मुजफ्फरनगर डिपो के पास परमिट सिर्फ शामली से पानीपत होकर है, उसी रूट से मुजफ्फरनगर डिपो को स्वीकृत परमिट के अनुसार रोडवेज बसों का संचालन करना होगा।
25 सालों से करनाल और यूपी से आने-जाने वाली रोडवेज-प्राइवेट बसें यमुना पुल से पहले रुक जाती हैं। सांसद हुकुम सिंह, केंद्रीय राज्यमंत्री संजीव बालियान, राज्य योजना आयोग के सदस्य सुधीर पंवार से जिले के लोग इस सीमा विवाद से अवगत करा चुके हैं। भाजपा की परिवर्तन यात्रा के साथ हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, केंद्रीय राज्यमंत्री संजीव बालियान साथ-साथ चल रहे हैं। जिले के लोगों को हरियाणा परिवहन विवाद समाप्त होने की उम्मीद है।