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UP: भैंस बीमा क्लेम विवाद में अदालत का बड़ा फैसला, कंपनी पर 90 हजार का जुर्माना

Fri, 24 Apr 2026 06:41 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शामली

सार

शामली उपभोक्ता आयोग ने भैंस की मृत्यु पर बीमा क्लेम न देने के मामले में नेशनल इंश्योरेंस कंपनी पर 90 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है और पीड़ित को 50 हजार रुपये बीमा राशि ब्याज सहित देने का आदेश दिया है।

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जुर्माना (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Adobe Graphics (अमर उजाला ग्राफिक्स)
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के शामली जनपद में भैंस की मौत के बाद बीमा क्लेम न देने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने बीमा कंपनी की लापरवाही मानते हुए उस पर 90 हजार रुपये का जुर्माना लगाया और पीड़ित को बीमा दावा राशि ब्याज सहित देने का आदेश दिया है।
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भैंस का कराया था बीमा, मौत के बाद नहीं मिला क्लेम
गांव टिटौली निवासी मोहित कुमार ने आयोग में परिवाद दायर कर बताया कि उन्होंने 4 फरवरी 2019 को अपनी भैंस का बीमा 282 रुपये प्रीमियम जमा कर पशुधन बीमा योजना के तहत कराया था।

उन्होंने बताया कि पशु चिकित्साधिकारी कंडेला ने उन्हें बीमा कराने के लिए इंश्योरेंस कंपनी से संपर्क करने को कहा था। कंपनी की ओर से बताया गया कि उनका प्रस्ताव पत्र स्वीकार कर लिया गया है और जल्द ही पॉलिसी जारी कर दी जाएगी। बाद में कंपनी ने यह भी कहा कि प्रस्ताव पत्र ही पॉलिसी के रूप में मान्य है।
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भैंस की मौत के बाद भी टालता रहा कंपनी का जवाब
परिवादी के अनुसार 12 जनवरी 2020 को उनकी भैंस की मौत हो गई। इसकी सूचना बीमा कंपनी को दी गई, जिसके बाद कंपनी की ओर से जांचकर्ता भेजा गया। जांच के दौरान भैंस की फोटो ली गई और पशु चिकित्साधिकारी कंडेला से पोस्टमार्टम भी कराया गया।

मोहित कुमार ने सभी जरूरी दस्तावेज कंपनी को सौंप दिए, लेकिन लंबे समय तक क्लेम के संबंध में कोई जवाब नहीं दिया गया। बाद में 9 दिसंबर 2020 को उन्होंने आईजीआरएस पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई। 20 दिसंबर 2020 को मिली प्रतिक्रिया में कंपनी ने कहा कि सब्सिडी समय से न मिलने के कारण भैंस की मौत के समय बीमा वैध नहीं था।

आयोग ने कंपनी को दिया भुगतान का आदेश
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता ने मामले की सुनवाई के बाद परिवाद स्वीकार कर लिया। आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश दिया कि वह परिवादी को 50 हजार रुपये बीमा दावा राशि छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ अदा करे।

इसके अलावा आयोग ने परिवादी को हुई शारीरिक, आर्थिक और मानसिक क्षति के लिए 20 हजार रुपये और अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए बीमा कंपनी पर 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया।

आयोग ने स्पष्ट किया कि अर्थदंड की राशि नियमानुसार राजकोष में जमा कराई जाएगी। साथ ही 45 दिनों के भीतर आदेश का पालन न करने पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

 
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