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Shamli News: कक्षा-11 से महंगा है कक्षा-7 का कोर्स

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- कक्षा-7 के कोर्स की कीमत साढ़े सात हजार से ज्यादा, साढ़े छह हजार में मिल रहा कक्षा-9 का कोर्स
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- स्कूलों ने 10 फीसदी तक बढ़ा दी फीस, कोरोना के समय ली गई फीस का नहीं किया गया समायोजन
फोटो
मिशन एडमिशन
शामली। स्कूलों में नए सत्र की शुरुआत हो चुकी है। अभिभावक एक बार फिर कोर्स की बढ़ी कीमत और फीस को लेकर परेशान हैं। स्कूल संचालकों की मनमानी के सामने अभिभावकों की मजबूरी हैं। मनमानी कीमतों पर उन्हें बच्चों का भविष्य संवारने के लिए किताबें खरीदनी पड़ रही हैं। एक निजी स्कूल का कक्षा-7 का कोर्स साढ़े सात हजार से ज्यादा में मिल रहा है। स्कूलों ने करीब 10 फीसदी फीस भी इस बार बढ़ा दी है।
इन दिनों कुछ चुनिंदा पुस्तक विक्रेताओं के यहां लंबी लाइन लग रही हैं। इन पुस्तक विक्रेताओं का निजी स्कूल संचालकों से करार है। निजी स्कूलों का कोर्स इन पुस्तक विक्रेताओं के अलावा कहीं ओर नहीं मिलेगा। कई स्कूलों ने तो अपने परिसर में ही पुस्तक विक्रेताओं को कोर्स बेचने के लिए कक्ष उपलब्ध करा दिए हैं। जहां अभिभावकों की जेब पर खुलेआम डाका डाला जा रहा है। अभिभावकों को भी मजबूरी में इन्हीं से महंगा कोर्स खरीदना पड़ रहा है। शिक्षा विभाग के अधिकारी इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं।
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छोटी कक्षाओं के कोर्स में बड़ा खेल
किताबों पर कमीशन का यह खेल छोटी कक्षाओं में ज्यादा है। जिनके कोर्स में एनसीईआरटी की किताबें नाम के लिए होती हैं। अधिकतर किताबें निजी प्रकाशकों की होती हैं। जिनकी कीमत काफी ज्यादा वसूली जाती है।
अधिकारी तो सुनते ही नहीं कैराना रोड स्थित एक दुकान पर कोर्स खरीदने आए अभिभावक ने बताया कि उनका एक बच्चा कक्षा-7 में और एक कक्षा-9 में पढ़ता है। कक्षा-7 का कोर्स साढ़े सात हजार से ज्यादा का आया है। जबकि कक्षा-9 का कोर्स साढ़े छह हजार का है। कोर्स में एनसीईआरटी की किताबें बस नाम के लिए हैं। ज्यादातर किताबें निजी प्रकाशकों की हैं।
शिक्षण व वाहन शुल्क किया दोगुना, डीएम से शिकायत

कांधला। क्षेत्र के कई गांव निवासी अभिभावकों ने एक निजी स्कूल के प्रधानाचार्य पर शिक्षण शुल्क और वाहन शुल्क को दोगुना करने का आरोप लगाया है। अभिभावकों ने डीएम को पत्र भेजकर समस्या के समाधान की मांग की है।
हर वर्ष नया शिक्षण सत्र शुरू होते ही अभिभावकों पर निजी स्कूलों में शिक्षण शुल्क के साथ ही किताबों सहित अन्य आवश्यक चीजों के खर्च का बोझ बढ़ जाता है। गुरुवार को क्षेत्र के गांव भारसी,भभीसा सहित कई गावों के अभिभावकों ने डीएम रविंद्र सिंह को पत्र भेजते हुए बताया कि उनके बच्चे शामली के एक निजी स्कूल में कई सालों से पढ़ रहे है। आरोप है कि स्कूल प्रधानाचार्य ने अचानक ही शिक्षण शुल्क और वाहन शुल्क को दोगुना कर दिया है।
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आरोप है कि उक्त स्कूल प्रधानाचार्य ने शुल्क में वृद्धि के साथ ही कई प्रकार के अन्य खर्च भी अभिभावकों को देने के लिए मजबूर किया जा रहा है। आरोप है कि निजी स्कूल प्रधानाचार्य अपनी मनमानी के चलते किसी अभिभावक की बात तक सुनने के लिए तैयार नहीं है। ऐसे में अभिभावकों के सामने एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। पीड़ित अभिभावकों ने डीएम को पत्र भेजकर मामले से अवगत कराकर समस्या के समाधान की मांग की है। इस दौरान सुनील कुमार, अंजनील, रुपेंद्र, मनोज सहित अन्य अभिभावक मौजूद रहे।
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