शामली। जिले में शिशु मातृत्व मृत्यु दर रोकने के लिए आशाएं व संगनी कार्यकर्ता 42 दिनों के अंदर सात बार घर जाकर बच्चों और मां के स्वास्थ्य की देखभाल करेंगी। घर-घर जाकर बच्चे का वजन करेंगी। साथ ही हाथ धोने, सांस की गति, बच्चे को सर्दी से बचाना और खतरे के लक्षणों की जानकारी देनी होगी।
मंगलवार को कलक्ट्रेट सभाकक्ष मेँ डीएम इंद्र विक्रम सिंह की अध्यक्षता में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन योजना के तहत संगनी और आशाओं की कार्यशाला आयोजित की गई। डीएम ने कहा कि शिशु व मातृत्व की मृत्यु दर को कम करने के लिए जिले की आशाओं और संगनी काम करना होगा।
शिशु व मातृत्व मृत्यु दर रोकने के लिए बच्चे और माताओं के घर 42 दिनों के अंदर सात से आठ बार जाकर खतरे के लक्षणों की जानकारी देनी होगी। उन्होंने थानाभवन- कुड़ाना क्षेत्र के अंतर्गत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन योजना में पिछड़ने के कारण पर चिंता प्रकट की। बैठक में सीएमओ डॉ. राजकुमार, एसीएमओ डॉ. सफल कुमार, जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. राजकुमार, एसीएमओ डॉ. नेतराम एसीएमओ डाक्टर एम एल शर्मा डिविजन मोनीटर सहित आशा व संगनी आदि उपस्थित थे।