शामली में एक आम किसान से लोकसभा, राज्यसभा और फिर गवर्नर तक सफर तय कर किसानों की आवाज बुलंद करने वाले चौधरी विरेंद्र वर्मा की आज सौवीं जयंती है। विरेंद्र वर्मा ने किसानों को उनका हक दिलाने के लिए दिल्ली तक लड़ाई लड़ी और उत्तरप्रदेश पश्चिम के शामली से राजनीति शुरू कर किसानों की आवाज को दिल्ली तक बुलंद किया। उनकी इसी अच्छाई के चलते आज किसान उनको याद करते है तो आंखें नम हो जाती है।
पश्चिम की माटी से किसानों की आवाज लोकसभा और राज्यसभा में उठाने में दो ही नाम प्रमुख रूप से सामने आते है। चौधरी चरण सिंह और शामली के चौधरी विरेंद्र वर्मा। विरेंद्र वर्मा ने राजनीति शुरू की तो उनके मन में कूट-कूट कर पिछडे़ लोगों, आम जन और किसान हितैषी सोच भरी हुई थी। कांग्रेस से 1948 में राजनीति की शुरूआत करने वाले चौधरी विरेंद्र वर्मा राज्यसभा सांसद, लोकसभा सांसद तथा कई बार मंत्री बने।
एक समय यूपी में राजनीति की धुरी रहे विरेंद्र वर्मा ने पिछड़े, अति पिछडे़ तथा किसानों के लिए काम किया। उनके पुत्र सतेंद्र वर्मा भी आज भी उसी सादगी के साथ अपना जीवन जी रहे है।