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जिले में हॉलमार्क लागू होने से पहले खोले जाएं सेंटर

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शामली। सरकार ने मिलावटी सोने और आभूषणों की बिक्री पर रोक लगाने के लिए हॉलमार्क अनिवार्य किया है। हॉल मार्किंग से सराफा कारोबारी और ग्राहक दोनों को ही फायदा होना बताया गया है, लेकिन जिले के सराफा कारोबारियों की समस्या है कि जिले में एक भी हॉलमार्क सेंटर नहीं है। हॉलमार्क कराने के लिए उन्हें दिल्ली या मेरठ जाना पड़ेगा, जिससे उनका समय बर्बाद होगा और खर्चा भी ज्यादा होगा। इस बारे में सराफा कारोबारियों से बात की गई तो उनका कहना है कि हॉलमार्क लागू करने से पहले जिले में हॉलमार्क सेंटर खोले जाने चाहिए।
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हॉलमार्क अनिवार्य करने से सर्राफा कारोबारियों और ग्राहक दोनों को फायदा है। ज्यादातर व्यापारी अब भी दिल्ली या मेरठ से हॉलमार्क कराकर आभूषण बेचते हैं। इसे अनिवार्य करने का कोई नुकसान नहीं है, लेकिन इसे लागू करने से पहले जिले में हॉलमार्क सेंटर खुलने चाहिए। - रवि संगल, नगराध्यक्ष, सराफा एसोसिएशन शामली।
सरकार के हॉलमार्क लागू करने से बाजार में स्वर्ण आभूषणों की शुद्धता की ग्राहकों को गारंटी मिलेगी। बड़े कारोबारी तो पहले से ही हॉलमार्क के आभूषण बेच रहे हैं, लेकिन जो व्यापारी आभूषण तैयार कर बेच रहे थे, उन्हें हॉलमार्क कराने के लिए मेरठ या दिल्ली जाना पड़ेगा। इसलिए जिले में हॉलमार्क सेंटर का होना जरूरी है। - विकास चौधरी, सराफा व्यापारी।
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सोने के आभूषणों पर हॉल मार्किंग का निर्णय सही है, लेकिन जिले में हॉलमार्क सेंटर न होने से मेरठ या दिल्ली जाना पड़ेगा। इससे समय बर्बाद होगा और खर्चा भी ज्यादा आएगा। जिले में हॉलमार्क सेंटर की व्यवस्था की जानी चाहिए। - अजय अग्रवाल, सराफा व्यापारी।
हॉलमार्क लागू होने से व्यापारी को यह परेशानी रहेगी कि जिले में हॉलमार्क सेंटर न होने के कारण उन्हें मेरठ या दिल्ली जाना पड़ेगा। इसलिए जिले में हॉलमार्क सेंटर होने चाहिए। हॉलमार्क होने से ग्राहक भी सोने की शुद्धता को लेकर भी संतुष्ट रहेंगे। - सुशील मित्तल, सराफा व्यापारी।
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