शामली में कैशलेस व्यवस्था की ओर बढ़ते समाज में एक नया उदाहरण पेश किया गया। शामली के हनुमान धाम पर एक ऐसी शादी हुई, जिसमें न बैंड बाजा था और न बाराती। रस्मों के मुताबिक पंडित जी ने पूजन कराया और वर वधू ने अग्नि को साक्षी मानते हुए सात फेरे दिलाए। शादी संपन्न होने पर वर वधू पक्ष ने एक दूसरे को बधाई दी और अपने घर रवाना हो गए।
यह रिश्ता भी किसी आम परिवारों में नहीं, बल्कि संपन्न परिवारों के बीच जुड़ा। दुल्हन पक्ष खतौली क्षेत्र से आया था, जबकि दूल्हा पक्ष शामली क्षेत्र के एक गांव का रहने वाला है। दूल्हे के परिवार में राजनीतिक लोग भी हैं और आर्थिक रूप से भी संपन्न हैं। दोनों ही परिवारों में आपसी सहमति बनने के बाद रिश्ता पक्का हुआ। नोटबंदी के बाद कैशलेस व्यवस्था को अपना सहयोग देते हुए दोनों ही परिवारों ने भी कैशलेस शादी करने का मन बनाया और बृहस्पतिवार को हनुमान धाम पर पहुंच गए।
वहां पंडित रामकुमार वशिष्ठ ने वर वधू के सात फेरे कराए। इसके बाद वर वधू ने परिजनों के पैर छूकर आशीर्वाद लिया और सात जन्मों के बंधन में बंध गए। इस दौरान वर वधू पक्ष से महज आठ लोग ही वहां मौजूद रहे। हालांकि दोनों ही परिवार के लोगों ने कैशलेस शादी का प्रचार कराने से इंकार कर दिया। उनका कहना था कि हम बगैर किसी के दबाव या लालच के कैशलेस शादी कर रहे हैं, मगर हम नहीं चाहते कि इसका ज्यादा प्रचार हो।