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रिम-धुरा उद्योग के लिए पूंजी का संकट

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रिम-धुरा उद्योग के लिए पूंजी का संकट
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शामली। देश भर में पहचान रखने वाला शामली का रिम-धुरा उद्योग इस समय पूंजी के संकट से जूझ रहा है। लोहा महंगा हो गया और बाजार में मांग नहीं होने से उत्पादों की बिक्री नहीं हो पा रही। इसके साथ ही बाजार में उद्यमियों की बड़ी रकम फंसी हुई है। उद्योग को दोबारा पटरी पर लाने के लिए पूंजी की जरूरत है। इसलिए उद्यमियों का कहना है कि पिछले साल की तरह सरकार को एमएसएमई सेक्टर को रियायत देनी चाहिए।
जिले में रिम-धुरा उद्योग की करीब 35 इकाईयां संचालित हैं। इन इकाईयों का 70 से 75 करोड़ रुपये का वार्षिक टर्नओवर है। यहां पर बने रिम -धुरे की पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में सप्लाई होती है। पिछले साल लागू हुए लॉकडाउन के दौरान इस उद्योग को काफी नुकसान पहुंचा था। इससे जुड़े उद्यमियों का कहना है कि पिछले साल के मुकाबले इस बार नुकसान कहीं ज्यादा है। इसका सबसे बड़ा कारण लोहे का महंगा हो जाना है। रिम-धुरा इंडस्ट्री एसोसिएशन के महासचिव वेदप्रकाश आर्य बताते हैं कि पिछले साल अगस्त माह में लोहे के दाम 35 से 36 रुपये प्रति किलो थे, लेकिन अब बढ़ 70 रुपये किलो हो गए हैं। इसके अलावा 18 प्रतिशत जीएसटी देना पड़ता है। कुल मिलाकर उद्यमियों को 88 रुपये किलो लोहा मिल रहा है। कच्चा माल खरीदने के लिए उद्यमियों को ज्यादा पूंजी की जरूरत है और बाजार में मांग नहीं होने से इंडस्ट्री ठप है।
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रिम-धुरा इंडस्ट्री एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रविंद जैन बताते हैं कि दिल्ली में बाजार बंद है। वहां से न तो माल आ रहा और न ही सप्लाई हो रहा है। इसके अलावा उद्यमियों का पैसा मार्केट में फंसा हुआ है। मांग नहीं होने के कारण उद्यमियों के पास पूंजी नहीं आ रही। जिले की रिम-धुरा फैक्टरी लगभग बंद पड़ी हैं। एसोसिएशन के दोनों पदाधिकारियों का कहना है कि सरकार को पिछले साल की तरह एमएसएमई सेक्टर को वित्तीय राहत देनी चाहिए।
20 प्रतिशत अधिक ऋण बिना गारंटी दिया था
शामली। पिछले साल सरकार ने एमएसएमई सेक्टर को काफी वित्तीय राहत दी थी। अग्रणी जिला प्रबंधक शैलेष कुमार बताते हैं कि उद्यमी पर जितना ऋण था उसका 20 प्रतिशत बिना गारंटी के दिया गया था। इसके अलावा ऋण वसूली में छूट दी गई थी। साथ ही उद्यमियों को ब्याज पर ब्याज की छूट भी मिली थी।
ऑक्सीजन की कमी भी बनी संकट
शामली: रिम-धुरा उद्योग के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। कोरोना की दूसरी लहर में उद्योगों को आक्सीजन की आपूर्ति बंद कर दी गई थी। इससे फैक्टरियों में काम बंद हो गया था। अभी फैक्टरियां शुरू नहीं हुई है। फैक्टरियां बंद होने से इनमें काम करने वाले श्रमिक और कारीगर अपने घरों को चले गए हैं। जब ऑक्सीजन मिलनी शुरू होगी तथा बाजार में मांग बढे़गी तो श्रमिकों और कारीगरों को बुलाकर फैक्टरियां शुरू की जाएंगी।
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ओडीओपी में भी नहीं मिला ज्यादा लाभ
शामली का रिम-धुरा उद्योग ओडीओपी में शामिल है। इसमें शामिल होने से भी इस उद्योग को ज्यादा लाभ नहीं मिल सका। पिछले साल जिले में एक-दो ही नई इंडस्ट्री लग सकी। ओडीओपी के तहत नए उद्योग लगाने पर 25 लाख तक के ऋण पर 25 प्रतिशत, 50 लाख पर 20 प्रतिशत तथा एक करोड़ पर 15 प्रतिशत सब्सिडी का लाभ मिल रहा है।
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