शामली। प्रत्याशी सपा का और चुनाव चिन्ह रालोद का, कैराना उप चुनाव में सपा, बसपा और रालोद गठबंधन ने मुस्लिम, दलित और जाट समीकरण पर दांव खेला है। एक तीर से दो निशाने पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने साधे हैं। उनके इस दांव से उप चुनाव में गठबंधन प्रत्याशी की हारजीत के साथ रालोद की प्रतिष्ठा भी जुड़ गई है, साथ ही 2014 के आम चुनाव में भाजपा के पाले में चले गए जाट वोटों को तबस्सुम को दिलाने की भी चुनौती है।
गठबंधन का यह फार्मूला काफी चौंकाने वाला रहा है, साथ ही राजनीतिक हल्कों में इसके नफे नुकसान को लेकर भी मंथन शुरू हो गया है। कैराना में विधान सभा चुनाव हो या लोकसभा चुनाव, यहां बाबू हुकुम सिंह और पूर्व सांसद मुनव्वर हसन परंपरागत प्रतिद्वंद्वी रहे हैं।
मुनव्वर हसन के निधन के बाद 2009 लोकसभा चुनाव में उनकी पत्नी तबस्सुम बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ी थीं और भाजपा प्रत्याशी हुकुम सिंह को हराकर सांसद बनी थीं। 2014 के लोकसभा चुनाव में कैराना से तबस्सुम के बेटे नाहिद हसन सपा के टिकट पर चुनाव लड़े, उन्हें भाजपा प्रत्याशी हुकुम सिंह ने हरा दिया था।
हुकुम सिंह के इस्तीफे से रिक्त हुई विधानसभा सीट पर हुए उप चुनाव में नाहिद हसन भाजपा प्रत्याशी अनिल चौहान को हराकर विधायक बने। 2017 के विधानसभा चुनाव में भी नाहिद हसन ने सपा के टिकट पर कैराना सीट से चुनाव लड़ा और भाजपा प्रत्याशी और हुकुम सिंह की पुत्री मृगांका सिंह को हराकर जीत दर्ज की। शुक्रवार को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी के बीच लखनऊ में हुई वार्ता के बाद यह तय हो गया था कि सपा बसपा गठबंधन में रालोद भी शामिल हो रहा है।
इसमें कैराना से सपा और नूरपुर से रालोद प्रत्याशी को चुनाव लड़ाने की बात सामने आई थी, सपा से तबस्सुम का नाम सामने आया, लेकिन इससे ध्रुवीकरण होने का अंदेशा भी था, देर रात मंथन के बाद यह तय हुआ कि रालोद के चुनाव चिन्ह पर तबस्सुम को लड़ाया जाए तो रालोद का परंपरागत जाट मतदाता भी उनके साथ जुड़ जाएगा। कुछ सपा नेताओं का भी मानना था कि रालोद को सीट देने से ध्रुवीकरण नहीं होगा। दलित और मुस्लिम मतों में जाट मतदाताओं के मिलने से एक मजबूत समीकरण बनेगा। रालोद के प्रदेश प्रवक्ता सुनील रोहटा ने बताया कि तबस्सुम हसन को गठबंधन की तरफ से कैराना लोकसभा सीट पर प्रत्याशी बनाना तय हो गया है।
27 कंपनी अर्द्धसैनिक बल संभालेंगे मोर्चा
शामली। लोकसभा उपचुनाव को सकुशल संपन्न कराने के लिए प्रशासन कटिबद्ध है। संवेदशनशील और अतिसंवेदनशील बूथों का निरीक्षण कर जिले में फोर्स का आंकलन कर लिया गया है। एसपी ने पूरे जिले में चुनाव व्यवस्था को संभालने के लिए 27 कंपनी पैरामिलिट्री और दस कंपनी पीएसी मांगी है।
कैराना लोकसभा सीट पर उपचुनाव की तैयारियां जोरों पर चल रही है। पुलिस प्रशासन की ओर से शरारती तत्वों का चिह्नीकरण किया जा रहा है। जिला बदर बदमाश को तलाश किया जा रहा है। साथ ही पूर्व चुनाव में घटना करने वालों पर निगरानी रखी जा रही है।
जिले की तीनों विधानसभा क्षेत्रों को मिलाकर जिले में 459 मतदान केंद्र और करीब 941 बूथ है। संवेदनशील और अतिसंवेदनशील बूथों विशेष निगरानी रखी जाएगी। पुलिस प्रशासन ने 27 कंपनी पैरामिलिट्री मांगी गई है। साथ ही पीएसी की 10 कंपनी और तीन हजार होमगार्ड मांगे गए है। जिला पुलिस के साथ ही पूरे जिले में एसआई, एचसीपी और कांस्टेबल सहित करीब तीन हजार सिविल पुलिसकर्मी की मांग चुनाव आयोग को भेजी गई है।
वहीं, एएसपी ने बताया कि हम उपचुनाव को शांतिपूर्वक संपन्न कराने के लिए कटिबद्ध हैं, अभी चुनाव को देखते हुए 27 कंपनी पैरामिलिट्री ओर 10 कंपनी पीएसी तथा अन्य फोर्स की मांग की गई है। उधर, चुनाव आयोग से जारी आदेशों के तहत सभी प्रत्याशी नामांकन पत्र पर अपना ब्लैक एंड व्हाइट फोटो लगाएंगे। नामाकन पत्र के साथ प्रारूप 26 पर दस रुपये के स्टांप पर शपथ देना होगा। सामान्य जाति के उम्मीदवार के लिए 25 हजार रुपये तथा अनुसूचित जाति जनजाति के उम्मीदवार के लिए 12500 रुपये की धनराशि रिटर्निग आफिसर के पास नकद व ट्रेजरी भारतीय स्टेट बैक शामली में जमा कराना होगा। बैंक, ड्राफ्ट और चेक मान्य नही होंगे।
पुलिस की कैराना पर रहेगी विशेष नजर
चुनाव के मद्देनजर कैराना शुरू से ही संवेदनशील रहता है। इस बार प्रदेश में बिजनौर जिले के नूरपुर विधानसभा क्षेत्र और कैराना लोकसभा क्षेत्र में उपचुनाव होना है। शहर में मुस्लिम आबादी अधिक है और कई बार चुनाव में यहां वोट डालने को लेकर पूर्व में कई बार विवाद भी हुआ है। इस चलते प्रशासन की नजर कैराना पर रहेगी। पुलिस-प्रशासन चाहता है कि हर सूरत में शांतिपूर्वक चुनाव संपन्न हो और किसी प्रकार की कोई गड़बड़ ना हो।
चप्पे-चप्पे पर फोर्स तैनात करने की कवायद
शामली जिले की सीमा हरियाणा से लगी हुई है। हरियाणा से यूपी में शराब तस्करी की जाती है। इसके अलावा एकतरफ मुजफ्फरनगर, सहारनपुर की सीमा भी शामली से लगी हुई है, लेकिन पुलिस-प्रशासन की मंशा है कि जितनी अधिक फोर्स रहेगी उतना ही मजबूत रहेगा। चुनाव आयोग की गाइडलाइन को ध्यान में रखते हुए तथा स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए यहां पुलिस की चप्पे-चप्पे पर फोर्स तैनात करने की कवायद है, जिसके चलते फोर्स की डिमांड की गई है।
फोर्स को ठहराने के इंतजाम में लगा प्रशासन
लोकसभा उपचुनाव को संपन्न कराने के लिए फोर्स की डिमांड करने के बाद प्रशासन अब इनके रुकने के लिए जगह की तलाश में लग गया है। एसपी के आदेश पर इस बार फोर्स के रहन-सहन की जिम्मेदारी सभी एसओ को सौंपी गई है। एसपी के स्पष्ट आदेश हैं कि किसी प्रकार की कोई परेशानी फोर्स को ना हो। कोशिश यह की जाएगी कि बूथ के आसपास ही फोर्स के रुकने का इंतजाम किया जाए।
तीसरे दिन भी नहीं खुला नामांकन का खाता
शामली। कैराना लोकसभा उपचुनाव के दौरान नामांकन प्रक्रिया के तीसरे दिन भी खाता नहीं खुला। कैैैराना लोकसभा उपचुनाव के तीसरे दिन भाजपा की ओर से मृंगाका सिंह, सुधाकर कश्यप निर्दलीय समेत चार नामांकन पत्र खरीदे हैं। दस मई तक प्रत्याशी अपना नामांकन पत्र दाखिल कर सकते हैं।
शनिवार को कलक्ट्रेट में डीएम कोर्ट में सहायक निर्वाचन अधिकारी व एसडीएम सदर सुुुरजीत सिंह के समक्ष अधिवक्ता ओपी कौशिक व सतेंद्र धिरयान ने मृंगाका सिंह पत्नी सुनील कुमार सिंह निवासी, अशोक नगर गाजियाबाद का भाजपा की ओर नामांकन पत्र खरीदा गया। मुजफ्फरनगर कंबलबाग निवासी सुक्रम सिंह ने मजदूर किसान यूनियन पाटी ने नामांकन पत्र खरीदा। शामली के काकानगर निवासी प्रदीप कुमार ने सुधाकर कश्यप का निर्दलीय रूप से नामांकन पत्र खरीदा गया। आंवला तहसील क्षेेत्र निवासी प्रीती कश्यप का जय हिंद जय भारत पार्टी की ओर से नामांकन पत्र खरीदा गया है। अभी तक 11 नामांकन पत्र खरीदे गए हैं। एआरओ एसडीएम सदर सुुरजीत सिंह ने बताया कि दस मई तक कैराना लोकसभा उपचुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल किए जाएंगे। नामांकन पत्रों की जांच 11 मई की जाएगी। 14 मई को नामांकन पत्रों की वापसी 14 मई को होगी। 28 मई को मतदान सुबह आठ बजे से लेकर शाम पांच बजे तक होगा। 31 मई को मतगणना होगी। डीएम इंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि नामांकन पत्र कलक्ट्रेट कंपाउड शामली में जिलाधिकारी न्यायालय के कक्ष में सुबह 11 बजे से तीन बजे तक दाखिल किए जाएंगे।