अपनी बेटी के साथ आशीष और रुचि बंसल
- फोटो : SHAMLI
शामली। मोहल्ला टीचर कालोनी निवासी रिटायर्ड शिक्षिका सरला मलिक ने अकेलेपन को मात देकर तीनों बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाकर उनका भविष्य बनाया है। पति के निधन के बाद जीवन में संघर्ष कर ऐसे लोगों के लिए मिसाल कायम की है जो अकेलेपन में हौसला खोकर निराश हो जाते हैं।
सरला मलिक ने 1979 में हिंदू कन्या इंटर कालेज शामली में शिक्षिका के पद पर ज्वाइन किया था। उनके पति डा. यशपाल सिंह मलिक पशु चिकित्सक थे। सरला ने बताया कि 1985 में पति के निधन से जीवन में बड़ा झटका लगा। उन्हें अकेलापन महसूस होने लगा था। उस समय दो बड़ी बेटियां कक्षा छह और सात में थी और बेटा दूसरी कक्षा में पढ़ रहा था। बच्चों को देखकर उन्होंने खुद संभाला बच्चों को शिक्षित कर उनका भविष्य बनाने का संकल्प लिया। उन्होंने कालेज के बाद बच्चों के साथ खुद को व्यस्त रखा और अकेलेपन को जीवन में हावी नहीं होने दिया। उन्होंने बताया कि उस समय वेतन इतना कम थी कि बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च चलाना मुश्किल था। इसके लिए बच्चों को ट्यूशन पढ़ाया। बड़ी बेटी निधि ने एमए बीएड किया। छोटी बेटी विनीता ने एमएससी पीएचडी की। वर्तमान में वह रोहतक में एमडी यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर है। बेटे निहार मलिक ने अमेरिका से वार्टन कालेज से एमबीए किया और वहीं जॉब कर रहा है। उनका कहना है कि जीवन में कभी निराश नहीं होना चाहिए। विपरीत परिस्थितियों में हौसले और हिम्मत से काम लेना चाहिए।
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अकेलेपन का मुख्य कारण है डिप्रेशन
मनोचिकित्सक डा. अरुण राय का कहना है कि अकेलापन के तीन कारण होते हैं, जिनमें मुख्य कारण है डिप्रेशन। डिप्रेशन में व्यक्ति अकेला रहना चाहता है। उसके पास कोई हो या न हो, उस पर फर्क नहीं पड़ता। वह लोगों से मिलना नहीं चाहता और बात नहीं करना चाहता। अपने आप में खोया रहता है। दूसरा कारण सीजियोफोरेनिया की वजह से वह अपने आप में खोया रहता है। तीसरा कारण व्यक्तित्व होता है। अपने व्यक्तित्व के कारण वह किसी से बात नहीं करता और अपने आप तक ही सीमित रहता है। उनके पास इस तरह के मामले आते रहते हैं। 10 मामलों में आठ मामले डिप्रेशन की वजह से होते हैं। अगर किसी बच्चे या व्यक्ति में इस तरह के लक्षण दिखाई दे तो चिकित्सक की सलाह लेकर उसका उपचार कराना चाहिए।
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समाज से जुड़ने पर सोच में आएगा बदलाव
शहर के झिंझाना रोड निवासी समाजशास्त्री एवं प्रधानाचार्य डा. विनीत चौहान ने बताया कि अकेलापन खतरनाक हो सकता है। इससे व्यक्ति डिप्रेशन में रहता है और कभी कभी आत्महत्या जैसे गलत कदम भी उठा लेता है। जिस व्यक्ति में अकेलापन के लक्षण दिखाई दे तो उससे बचाव का सबसे सरल तरीका ये है कि उसे समाज से जोड़ा जाए। सामाजिक व धार्मिक कार्यों से जोड़ा जाए। इससे उसकी सोच में बदलाव आएगा और वह सामान्य तरीके से जीवन यापन करने लगेगा।
अपनी दो बेटियों के साथ रोमित और सोनाली मित्तल- फोटो : SHAMLI
आदर्श दंपत्ति पंकज और निशा गर्ग- फोटो : SHAMLI