थानाभवन (शामली)। भले ही देश में पॉलिथीन प्रतिबंधित होने के फैसले का आम जनता के साथ व्यापारी वर्ग भी समर्थन कर रहा है, लेकिन, पॉलिथीन के विकल्प के तौर पर बाजार में उपलब्ध जूट के थैले दुकानदारों को पॉलिथीन के मुकाबले दोगुने दाम में पड़ रहे हैं। कस्बे का व्यापारी वर्ग चाहता है कि सरकार पॉलिथीन का ऐसा विकल्प तलाशे, जो मजबूत होने के साथ उन्हें अधिक महंगा न पड़े।
देश को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार ने देश में सिंगल यूज पॉलिथीन पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके परिणाम भी सामने आने लगे हैं। अब पॉलिथीन के विकल्प के तौर पर बाजार में जूट के थैले उपलब्ध हैं। लेकिन पॉलिथीन 100 रुपये प्रति किग्रा के हिसाब से व्यापारियों को उपलब्ध होती थी, जबकि जूट के थैले के दाम 200 रुपये प्रति किलो है। जूट का वजन भी पॉलिथीन से अधिक है। इससे जूट के पीस भी पॉलिथीन के थैलों के मुकाबले कम होते हैं। साथ ही जूट के थैले बहुत कमजोर हैं, जो थोड़ा सा दबाव पड़ते ही फट जाते हैं। इससे व्यापारियों पर तो अधिक बोझ पड रहा है वहीं ग्राहकों को भी सहूलियत नहीं मिल रही।
जागरूक नहीं हो रहे ग्राहक
व्यापारियों का कहना है कि वह लगातार ग्राहकों से अपने घर से ही थैले लाने की अपील कर रहे हैं। इनमें कुछेक को छोड़कर अधिकांश ग्राहक सिर्फ खाली हाथ दुकानों पर आ जाते हैं। इससे उन्हें भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
बोले व्यापारी
हम लोगों ने पॉलिथीन का पूर्ण रूप से बहिष्कार कर दिया है। लेकिन, जूट के थैले अच्छा विकल्प नहीं है। जूट के थैले इस्तेमाल करने में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।--विनोद गोयल
सरकार को चाहिए कि वह लोगों को जागरूक करें कि वह लोग जब भी बाजार से सामान खरीदने निकले तो घर से थैले आदि साथ लेकर चलें, जिससे न उन्हें कोई दिक्कत हो और न दुकानदारों को।--मंगलू सिंह
पॉलिथीन पर प्रतिबंध का कदम सराहनीय कार्य है। लेकिन, सरकार को इसके बेहतर विकल्प तलाशने चाहिए। हम लोग लोगों से भी अपील कर रहे हैं वह थैले अपने घरों से लेकर आए।--अभिषेक कुमार
जूट का थैला इस्तेमाल करने में वैसे तो कोई परेशानी नहीं है। लेकिन, यह थैला बहुत कमजोर है। इस संबंध में सरकार को कदम उठाते हुए इसके सस्ते विकल्प तलाशने होंगे।--तनवीर राई