शामली। जीएसटी की नई दरें लागू होने के बाद भी अभी तक दुकानदारों और ग्राहकों में स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। कुछ बड़े दुकानदारों को छोड़कर अधिकतर दुकानदार पुराने स्लैब पर ही बिक्री कर रहे हैं। शहर में केवल ऑटोमोबाइल के क्षेत्र में ही ग्राहकों को जीएसटी पर छूट मिलती नजर आई। ऐसे में खरीदारी करने पहुंच रहे ग्राहक मायूस हो रहे हैं।
नए स्लैब लागू कराने के लिए अभी कोई निगरानी शुरू नहीं हो पाई है। सरकार ने 28 प्रतिशत और 12 प्रतिशत का स्लैब खत्म कर दिया है। अब 18 प्रतिशत और पांच प्रतिशत का स्लैब बचा है। इसमें एलईडी, एसी, बाइक, कार, खाने-पीने की अधिकतर सामग्री, कपड़े व जूते पर दाम घट गए हैं। सरकार ने पुराने स्लैब पर सामान न बेचने की घोषणा की है। हालांकि बड़े दुकानदार और शोरूम संचालक नए दरों पर सामान बेच रहे हैं। मंगलवार को शहर के बाजारों और बाइक-कार और ट्रैक्टर एजेंसियों पर पड़ताल की तो केवल कार-बाइक व ट्रैक्टरों पर ही छूट मिलती नजर आई, जबकि बाजारों में जूते, कपड़े और घरेलू व खाने पीने के सामान पर पहले की तरह ही पुरानी दरों पर बिक्री होती नजर आई। शहर के झिंझाना रोड पर मैनेजर तुषार संगल ने बताया कि छूट मिलने के कारण ग्राहकों की लाइन लगी है। 200 वाहन बिक चुके हैं। ग्राहक रुपेश भिक्का माजरा ने बताया कि उन्होंने बाइक खरीदी है, उन्हें सात हजार की छूट मिली है।
ट्रैक्टर एजेंसी पर अमन निर्वाल ने बताया कि दर कम होने पर 50 हजार रुपये कम हुए हैं। पांच ट्रैक्टर किसानों ने खरीदे हैं। कैराना रोड पर कार शोरूम में संगम गिरी ने बताया कि कार पर 40 हजार से डेढ़ लाख रुपये तक छूट मिल रही है। अभी तक 40 गाड़ियां बिक चुकी हैं। दूसरी एजेंसी पर जीएम सुनील मेहरा ने बताया कि 190 कार बुक हुईं और 140 कारें जा चुकी हैं।
एजेंसी पर पहुंचे बिडौली के गौरव ने बताया कि उन्हें 1200 सीसी की कार पर 50 हजार की छूट मिली है। छूट से वह काफी खुश हैं। बाइक एजेंसी पर देखने को मिला कि बाइकों पर ही पहले और हाल की कीमत में कितनी छूट हुई है, यह पूरी लिस्ट चस्पा हुई थी। इससे ग्राहकों को पूछना ही न पड़े कि कितनी छूट हुई है। संचालक आकाश ने बताया कि छूट मिलने से बिक्री बढ़ी है। 85 बाइकें नवरात्र में बिक चुकी हैं।
कपड़े-जूते और घरेलू सामान पर नहीं दिखा असर
मुख्य मार्ग पर जूते की दुकान पर देखने को मिला कि पुराना स्टॉक कम दाम किए बिना ही निकाला जा रहा है। व्यापारी नवीन से पूछा तो उन्होंने बताया कि नया माल नई घटी एमआरपी पर आने लगा है, जिसे नई दरों के अनुसार ही बेचा जा रहा है। चप्पल पर पहले 239 एमआरपी था, लेकिन नया माल आया तो उस पर 209 एमआरपी आया है। ग्राहक राहुल ने बताया कि उन्होंने छूट के लिए कहा तो केवल 50 रुपये कम किए हैं। वहीं रेडीमेड गारमेंट व्यापारी स्पर्श ने बताया कि नया माल घटी दरों पर आ रहा है।
उन्होंने पुराने स्टॉक पर एमआरपी बदली है, लेकिन ग्राहक सुनीता के बाहर आने पर पूछा तो उन्होंने बताया कि उन्हें कोई छूट नजर नहीं आई है। सब्जी मंडी स्थित घरेलू सामान दुकानदार अनुज से जीएसटी छूट के बारे में पूछा तो दुकानदार ने बताया कि उन्हें जीएसटी छूट के बारे में पूरी जानकारी नहीं है। जो सामान आगे से सस्ता आता है, उसे ही छूट के साथ दिया जा रहा है। पहले देशी घी 590 का बिक रहा था, नया माल आया तो 30 रुपये कम दिया जा रहा है, जबकि ग्राहक सौरभ व अमित ने बताया कि कोई बिल नहीं दिया जाता, पहले की तरह ही सामान बेचा जा रहा है। कोई निगरानी टीम नहीं है।
-रोजमर्रा की वस्तुओं के घटे दाम
रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले सामान जैसे पैक्ड दूध, पनीर, बटर, घी, नमकीन, बिस्कुट आदि 12 प्रतिशत के स्लैब से पांच प्रतिशत के स्लैब में आ गए हैं। किताबों, कॉपियों व पेंसिल पर जीएसटी हटा दी गई। अभी बाजार में लागू नहीं हो पाई है। दुकानदार अब भी पुराने दामों पर बिक्री कर रहे हैं।
-बाजार में चल रहा कच्चे-पक्के बिल का खेल
छोटे दुकानदार आमतौर पर ग्राहकों को पक्का बिल नहीं देते। ग्राहक भी बिल नहीं मांगता, जिसका दुकानदार फायदा उठाते हैं। वे पुराने एमआरपी पर ही ग्राहक को सामान बेच रहे हैं। लोगों ने बताया कि नमकीन-बिस्कुट और अन्य घरेलू इस्तेमाल में आने वाले सामान की कीमतों को दुकानदारों ने कम नहीं किया है।
-ग्राहक बोले-नए कानून को लागू करने लिए सरकार उठाए कदम
-अभी तो रोजमर्रा का सामान पुराने स्लैब पर ही मिल रहा है। इससे ग्राहकों को नुकसान है, लेकिन मजबूरी है कि जरूरत का सामान खरीदना पड़ रहा है। जीएसटी के नए कानून को लागू करने के लिए सरकार को कदम उठाने चाहिए।-मुनेश
-अभी बिस्कुट, नमकीन, समेत खान-पान की अन्य वस्तुएं पुराने स्लैब पर मिल रही हैं। दुकानदार से कहने पर उसने कहा कि पीछे से नए स्लैब पर सामान नहीं मिल पा रहा है।-अमित शर्मा
-त्योहार का सीजन चल रहा है। जूते और कपड़ों खरीदारी भी करनी है, लेकिन जीएसटी दर कम होने के बाद भी दुकानदार पुरानी दरों पर ही समान बेच रहे हैं। सरकार को निगरानी टीम बनानी चाहिए। -सोनी कुमारी